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Tuesday, August 4, 2026

चंद्रशेखर की विरासत पर घमासान: भारत यात्रा ट्रस्ट की संपत्तियों पर विवाद

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– ट्रस्ट के प्रमुख प्रो. एच. एन. शर्मा का बढ़ा खतरा
– बलिया डीएम राजनैतिक दवाव मे नहीं ले पा रहे निर्णय
– इंटरनेशनल पक्षी विहार के लिये संपत्तियां हो रही कब्जा लखनऊ की जमीने भी दवंगों के निशाने पर
बलिया/नई दिल्ली। देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर ने राजनीति को केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का अभियान माना। वर्ष 1983 की ऐतिहासिक भारत यात्रा के बाद स्थापित भारत यात्रा ट्रस्ट का उद्देश्य ग्रामीण विकास, सामाजिक चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना था। लेकिन आज यही ट्रस्ट अपनी संपत्तियों, प्रशासन और अभिलेखों को लेकर गंभीर विवादों के केंद्र में है। सार्वजनिक रिकॉर्ड बताते हैं कि ट्रस्ट के प्रशासन और कथित कुप्रबंधन को लेकर वर्षों से उच्चाधिकारीयों में मामले चल रहे हैं।

ट्रस्ट से जुड़े लोगों का आरोप है कि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की वैचारिक विरासत और ट्रस्ट की संपत्तियों पर नियंत्रण को लेकर लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। उनका दावा है कि ट्रस्ट की संपत्तियों को निजी नियंत्रण में लेने की कोशिशें हुईं, जबकि दूसरी ओर ट्रस्ट की मूल भावना और सार्वजनिक चरित्र को बचाने के लिए कुछ पुराने सहयोगियों ने कानूनी लड़ाई लड़ी। अब पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार वाले ही ट्रस्ट को हड़पने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं जबकि भारत के कैबिनेट सचिव प्रोफेसर शर्मा को ही ट्रस्ट का मुख्य कर्ता धर्ता मान रहे हैं। यह ट्रस्ट पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी द्वारा बनाया गया था ट्रस्ट की कई जमीने हैं, ज़ो पूर्व प्रधानमंत्री के परिजनों द्वारा बेची जा चुकी है जिनकी शिकायत पूर्व पीएम की भतीजी द्वारा भी की गई है।

इन्हीं में पूर्व प्रधानमंत्री के पूर्व राजनीतिक सलाहकार प्रो. एच. एन. शर्मा प्रमुख नाम हैं। वे वर्षों से सरकार में ट्रस्ट के प्रशासन, कथित अनियमितताओं और सार्वजनिक हित से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं। हाल में दिल्ली ने भी माना कि ट्रस्ट के प्रशासन में उनका पर्याप्त हित है और मामला आगे सुनवाई योग्य है।
रिकॉर्ड के अनुसार, भारत यात्रा ट्रस्ट के प्रशासन, कथित कुप्रबंधन और न्यायालय की निगरानी में सुधार की मांग को लेकर मामला लंबे समय से लंबित है। सक्षम प्राधिकारों ने यह भी माना कि ट्रस्ट एक सार्वजनिक धर्मार्थ संस्था है तथा लगाए गए आरोपों की सुनवाई आवश्यक है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय अभी शेष है।
विवाद का एक महत्वपूर्ण पक्ष ट्रस्ट से जुड़े अभिलेखों का है। दस्तावेज़ मांगने वाले पक्ष का आरोप है कि बलिया जिला प्रशासन से ट्रस्ट संबंधी सूचनाएं और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का अनुरोध किए जाने के बावजूद अपेक्षित जानकारी नहीं दी गई। यदि ऐसा है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि सार्वजनिक महत्व के एक ऐतिहासिक ट्रस्ट के अभिलेखों तक पहुंच में बाधा क्यों आ रही है।
यदि किसी आरटीआई आवेदन, पत्राचार या अन्य वैधानिक प्रक्रिया के तहत जानकारी मांगी गई है और उसका संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, तो यह मामला पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों के दायरे में आता है।
भारत यात्रा ट्रस्ट और उससे जुड़े केंद्रों के पास विभिन्न राज्यों में भूमि एवं अन्य परिसंपत्तियां होने का उल्लेख वर्षों से सार्वजनिक चर्चाओं और मीडिया रिपोर्टों में मिलता रहा है। इन्हीं संपत्तियों के नियंत्रण और प्रबंधन को लेकर समय-समय पर विवाद भी सामने आए हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने भारत यात्रा के माध्यम से जिस सामाजिक चेतना और जनसेवा का सपना देखा था, क्या आज वही ट्रस्ट कानूनी लड़ाइयों, संपत्ति विवादों और प्रशासनिक गोपनीयता के बीच उलझ गया है?

अब निगाहें डीएम न्यायालय की आगामी कार्यवाही और प्रशासन की पारदर्शिता पर टिकी हैं। यदि सभी संबंधित अभिलेख सार्वजनिक किए जाते हैं, तो इससे न केवल विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि देश के एक ऐतिहासिक सार्वजनिक ट्रस्ट की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।

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