तेहरान/वॉशिंगटन/बगदाद।
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित अर्धसैनिक बलों के कई ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमला किया। अमेरिकी सेना का दावा है कि इन ठिकानों से अमेरिकी सैनिकों और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों की तैयारी की जा रही थी। वहीं ईरान समर्थित संगठन ने हमले में अपने 10 लड़ाकों के मारे जाने और कई अन्य के घायल होने की पुष्टि की है।
हवाई हमलों के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे की दिशा में कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना के अनुसार सभी मिसाइलों को रास्ते में ही मार गिराया गया, जिससे किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। हालांकि इस घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में सैन्य सतर्कता बढ़ा दी गई है।
इराक के निनेवेह सहित कई इलाकों में हुए हमलों में अर्धसैनिक बलों के ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रभावित क्षेत्रों से धुएं के गुबार उठते दिखाई दिए। संगठन ने इन हमलों को इराक की संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
इस बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण को लेकर ओमान के साझा प्रबंधन वाले प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर उसका नियंत्रण बना रहेगा। दूसरी ओर, क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच कई देशों ने अपने सुरक्षा इंतजाम और कड़े कर दिए हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों की निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग की। भारत ने कहा कि समुद्री सुरक्षा वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
लगातार बढ़ते सैन्य तनाव और जवाबी कार्रवाइयों ने पूरे मध्य पूर्व में व्यापक संघर्ष की आशंका को और गहरा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।


