समधन ईओ दिव्या गुप्ता पर जांच की मांग
कन्नौज। योगी सरकार में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा है, लेकिन समधन नगर पंचायत में आरोपों की फेहरिस्त देखकर लगता है कि यहां हिसाब-किताब कुछ ज्यादा ही तेज चल रहा है। कई करोड़ की संपत्ति से लेकर रिश्तेदारों के खातों में लेनदेन और ठेकेदारों की आरटीजीएस तक मामला अब सिर्फ चर्चाओं का नहीं, बल्कि जांच की मांग तक पहुंच गया है। नगर पंचायत के लोगों और कुछ सभासदों का कहना है कि जरा हिसाब तो हो जाए कि 6 जनवरी से अब तक कुर्सी पर बैठकर कितनी तरक्की हुई और धन आखिर किन-किन रास्तों से होकर कहां पहुंचा।
नगर पंचायत समधन की अधिशासी अधिकारी दिव्या गुप्ता को लेकर संपत्तियों की खरीद, बैंक खातों और नगर पंचायत से जुड़े वित्तीय लेनदेन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने शासन से मांग की है कि अधिशासी अधिकारी की नियुक्ति एवं सेवा अवधि से वर्तमान तक की ज्ञात आय, वेतन, अन्य वैध आय, चल-अचल संपत्तियों, निवेश और बैंक खातों का आय-व्यय के आधार पर परीक्षण कराया जाए। साथ ही उनके पारिवारिक जनों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों और उनके बैंक खातों में हुए लेनदेन की भी जांच कराई जाए।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार अधिशासी अधिकारी की सेवा अवधि के दौरान उनकी मां सीमा गुप्ता के नाम जहानगंज-कमालगंज मार्ग पर करीब 80 लाख रुपये बाजार मूल्य की संपत्ति खरीदे जाने का आरोप है। इसी मार्ग पर एक अन्य प्लाट तथा कानपुर में पारिवारिक जनों के नाम तीन प्लाट खरीदे जाने की भी चर्चा है। मांग की गई है कि इन सभी संपत्तियों के बैनामे, खरीद मूल्य, वर्तमान बाजार मूल्य और धन के स्रोत की जांच हो, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संपत्तियों की खरीद के लिए धन कहां से आया।
मामले में नगर पंचायत से जुड़े ठेकेदारों के भुगतान और अधिशासी अधिकारी के पारिवारिक जनों के खातों के बीच लेनदेन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ ठेकेदारों की ओर से अधिशासी अधिकारी के भाई कार्तिकेय गुप्ता के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से रकम भेजी गई। वहीं एक नगर पंचायत कर्मचारी के हवाले से यह भी आरोप लगाया गया है कि कार्यालय में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर के खाते से अधिशासी अधिकारी के पारिवारिक जनों के खातों में रकम स्थानांतरित की गई। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित बैंक खातों की जांच और नगर पंचायत के भुगतान अभिलेखों से उनका मिलान कराने की मांग की है।
मामले में नगर पंचायत अध्यक्ष के पुत्र अयान सिद्दीकी का नाम भी स्थानीय चर्चाओं में सामने आया है। अधिशासी अधिकारी और अयान सिद्दीकी के बीच नजदीकियों को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं हैं। दोनों मिलकर सरकारी धन को चूना लगा रहे हैं।इसके अलावा अधिशासी अधिकारी के कमालगंज स्थित एक प्लाट पर निर्माण कार्य चलने और वहां इस्तेमाल हो रही ईंटों को नगर पंचायत अध्यक्ष के परिवार से जुड़े ईंट भट्ठे से लाए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
परिवार के लोगों को नगर पंचायत से जोड़ने के आरोप
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि अधिशासी अधिकारी ने अपने पारिवारिक जनों को नगर पंचायत से जुड़े कार्यों में रखा और उनके खातों में धनराशि पहुंचने की शिकायतें सामने आई हैं। लोगों और कुछ सभासदों की मांग है कि नगर पंचायत में नियुक्ति, आउटसोर्सिंग, मानदेय, भुगतान, ठेके और अन्य वित्तीय लाभ से जुड़े सभी अभिलेखों की जांच कराई जाए। यदि किसी पारिवारिक सदस्य को नगर पंचायत से आर्थिक लाभ मिला है तो उसकी भूमिका और भुगतान का आधार भी सामने लाया जाए।
6 जनवरी से अब तक के कामों की हो सतर्कता जांच
नगर पंचायत के लोगों और कुछ सभासदों ने शासन से मांग की है कि 6 जनवरी से अब तक अधिशासी अधिकारी के कार्यकाल में हुए निर्माण कार्यों, खरीद, ठेकों, भुगतान, आरटीजीएस लेनदेन और अन्य वित्तीय गतिविधियों की सतर्कता विभाग से स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही उनकी पूर्व तैनाती के दौरान के कार्यकाल को भी जांच के दायरे में शामिल करने की मांग की गई है।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच केवल नगर पंचायत के रिकॉर्ड तक सीमित न रहे, बल्कि अधिशासी अधिकारी और उनके पारिवारिक जनों की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और नगर पंचायत से जुड़े भुगतान का आपस में मिलान कराया जाए। यदि जांच में ज्ञात वैध आय की तुलना में संपत्ति या खर्च अनुपातहीन पाया जाता है अथवा नगर पंचायत से जुड़े धन के लेनदेन की पुष्टि होती है तो लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए। अब निगाहें शासन पर हैं कि आरोपों के इस पूरे हिसाब-किताब की जांच कब शुरू होती है और जांच की आंच किन-किन कागजों और खातों तक पहुंचती है।


