शरद कटियार
लखनऊ।उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और सुशासन को लेकर सरकार लगातार सख्ती का संदेश देती रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं कई बार अधिकारियों और कर्मचारियों को जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने तथा भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने के निर्देश दे चुके हैं। इसके बावजूद प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पुलिस और राजस्व विभाग के कामकाज को लेकर शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। यही कारण है कि आम लोगों के बीच यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि यदि जमीनी स्तर पर व्यवस्था नहीं सुधरी तो उसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है।
सबसे अधिक शिकायतें वाहन चेकिंग अभियान को लेकर सामने आती हैं। लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर यातायात नियमों का पालन कराने के बजाय चेकिंग अभियान आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। कई वाहन चालक यह शिकायत करते हैं कि उनके साथ अनावश्यक सख्ती की जाती है, जबकि प्रभावशाली लोगों के प्रति अलग रवैया अपनाया जाता है। यदि ऐसी शिकायतें वास्तविक हैं, तो निष्पक्ष कार्रवाई और पारदर्शी व्यवस्था आवश्यक है।
पुलिस थानों की कार्यप्रणाली को लेकर भी लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। छोटे और मध्यम वर्ग के लोग अक्सर आरोप लगाते हैं कि उनकी शिकायतों पर समय से सुनवाई नहीं होती, जबकि प्रभावशाली लोगों के मामलों में तेजी दिखाई देती है। यदि आम नागरिक को न्याय के लिए बार-बार थाने के चक्कर लगाने पड़ें, तो पुलिस के प्रति उसका विश्वास कमजोर होना स्वाभाविक है।
राजस्व विभाग भी अक्सर विवादों के केंद्र में रहता है। विरासत, दाखिल-खारिज, नामांतरण और भूमि अभिलेखों से जुड़े मामलों में देरी तथा कथित भ्रष्टाचार की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं। कई लोग आरोप लगाते हैं कि बिना अनावश्यक दौड़भाग या कथित लेन-देन के साधारण काम भी समय पर नहीं हो पाते। ऐसी शिकायतें प्रशासनिक व्यवस्था की छवि को प्रभावित करती हैं।
जानकारों का मानना है कि सरकार की योजनाओं का मूल्यांकन जनता अंततः स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों के व्यवहार से ही करती है। गांव में लेखपाल, कानून-व्यवस्था के लिए पुलिस और तहसील स्तर के कर्मचारी ही सरकार का चेहरा माने जाते हैं। यदि इन्हीं स्तरों पर जनता को सम्मानजनक व्यवहार, पारदर्शिता और समयबद्ध सेवा नहीं मिलेगी, तो उसका असर सरकार की छवि पर भी पड़ सकता है।
यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि पुलिस और राजस्व विभाग में बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। इसलिए किसी पूरे विभाग पर एक समान टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। लेकिन जहां भी भ्रष्टाचार, उत्पीड़न या लापरवाही की शिकायतें हों, वहां त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई होना आवश्यक है।
सुशासन केवल योजनाएं बनाने से नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन से स्थापित होता है। यदि थाने में हर शिकायतकर्ता की निष्पक्ष सुनवाई हो, राजस्व संबंधी कार्य समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरे हों तथा भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई हो, तो जनता का विश्वास और मजबूत होगा। यही किसी भी सरकार की सबसे बड़ी ताकत होती है।
योगी सरकार गिरी तो पुलिस-राजस्व तंत्र होगासबसे बड़ा कारण


