
– जंतर-मंतर पर पुलिस द्वारा बेटी के कपडे फाड़ने को बनाया बड़ा मुद्दा
नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र बुधवार को उस समय गरमा गया जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा पूरे आक्रामक अंदाज में सदन में उठाया। उन्होंने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं, छात्रों और नौजवानों के भविष्य का सवाल है।
सदन में बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “यह मुद्दा समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी का नहीं है, यह मुद्दा युवाओं, छात्रों और नौजवानों का है। आखिर युवाओं के लिए इस सदन में क्यों नहीं बोला जा सकता?”
उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ भी अभद्र व्यवहार हुआ। इसी दौरान उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा, “क्या बेटियों के कपड़े फाड़ेंगे आप? क्या यही लोकतंत्र है? क्या अपनी बात कहना अब अपराध हो गया है?”
अखिलेश यादव ने कहा कि जब देश का युवा अपनी शिक्षा, रोजगार और भविष्य की चिंता लेकर सड़कों पर उतरता है, तब सरकार को उसकी बात सुननी चाहिए, न कि पुलिस के बल पर उसकी आवाज़ दबाने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति का सम्मान होना चाहिए और छात्रों पर बल प्रयोग किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने सरकार से मांग की कि जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी अधिकारी द्वारा अधिकारों का दुरुपयोग किया गया है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि देश का युवा अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है और विपक्ष उसकी आवाज़ संसद के भीतर मजबूती से उठाता रहेगा।
अखिलेश यादव के भाषण के दौरान सदन का माहौल काफी गर्म रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और युवाओं के अधिकारों का मुद्दा संसद की प्रमुख बहसों में शामिल हो गया।


