मां बोलीं– मेरे बच्चे…, बेटे ने नम आंखों से दी मुखाग्नि
बागपत। त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक अनुराग धनखड़ को बुधवार को उनके पैतृक जनपद बागपत में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। श्मशान घाट पर गार्ड ऑफ ऑनर और हवाई सलामी के बीच जब बेटे अभिषेक ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी तो वहां मौजूद हर आंख नम हो गई। परिवार का दर्द देख अंतिम संस्कार में शामिल लोग भी अपने आंसू नहीं रोक सके।
मंगलवार देर रात जब अनुराग धनखड़ का पार्थिव शरीर बड़ौत स्थित आवास पहुंचा तो सबसे मार्मिक दृश्य उनकी मां रगबीरी का था। बेटे का चेहरा देखते ही वह बेसुध होकर फूट-फूटकर रो पड़ीं। कांपते हाथों से बेटे के गाल सहलाते हुए बार-बार कहती रहीं, “मेरे बच्चे… मेरे बच्चे…”। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं।
पत्नी कल्पना धनखड़ पति के पार्थिव शरीर से लिपटकर बिलखती रहीं। वह बार-बार पूछती रहीं, “अब हमें छोड़कर कहां चले गए?”। इकलौता बेटा अभिषेक अपनी मां को संभालने की कोशिश करता रहा, लेकिन खुद भी पिता के पार्थिव शरीर से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़ा। परिजनों ने किसी तरह उसे संभाला।
बुधवार सुबह निकली अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी और स्थानीय लोग शामिल हुए। करीब एक किलोमीटर लंबी अंतिम यात्रा के बाद दिल्ली-सहारनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित श्मशान घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
अनुराग धनखड़ 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी थे। उन्होंने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। पंजाब नेशनल बैंक घोटाला और नीरव मोदी प्रकरण जैसे चर्चित मामलों की जांच में भी उनकी अहम भूमिका रही। कुछ समय पहले ही उन्हें त्रिपुरा का पुलिस महानिदेशक बनाया गया था।
20 जुलाई को उनका शव अगरतला स्थित पुलिस मुख्यालय में मिला था। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका जताई गई है, हालांकि मामले की जांच जारी है। इस घटना ने पूरे पुलिस महकमे और उनके गृह जनपद बागपत को गहरे सदमे में डाल दिया है। कई लोगों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग भी उठाई है।


