लखनऊ
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की जांच के दौरान एक बड़े अंतरराज्यीय संदिग्ध दवा नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि राजस्थान से दवाएं बनाकर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बिना बिल के सप्लाई की जा रही थीं। कार्रवाई के दौरान अब तक करीब 24 लाख रुपये मूल्य की संदिग्ध दवाएं जब्त की गई हैं। इनमें ब्लड प्रेशर, एंटीबायोटिक, दर्द, एसिडिटी और एंटी-एंग्जायटी जैसी आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध समेत विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने की संस्तुति की गई है।
FSDA की टीम ने अमीनाबाद स्थित गोदाम से लगभग 21 लाख रुपये और बक्शी का तालाब क्षेत्र से करीब 3 लाख रुपये की संदिग्ध दवाएं सील की हैं। कुल 31 दवा नमूनों को जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला भेजा गया है। अधिकारियों के अनुसार, लैब रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दवाएं नकली हैं या गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरतीं। प्रारंभिक जांच में कुछ दवाओं के नामों की स्पेलिंग में मामूली बदलाव पाए गए, जिससे उनके संदिग्ध होने का संकेत मिला।
जांच में यह भी सामने आया कि दवाएं राजस्थान से निजी बसों और रोडवेज के माध्यम से लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गोंडा, सीतापुर सहित कई जिलों में भेजी जाती थीं। भुगतान डिजिटल माध्यमों से किया जाता था और बिना बिल के कम कीमत पर खरीदी गई दवाओं को बाजार में अधिक मुनाफे पर बेचा जाता था। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि ये दवाएं नकली या घटिया गुणवत्ता की साबित होती हैं, तो मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से ब्लड प्रेशर, एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवाओं की गुणवत्ता खराब होने से जान का खतरा भी बढ़ सकता है।
मामले में राजस्थान के भूपेंद्र शर्मा और उसके सहयोगी गुर्जर को नेटवर्क का मुख्य संचालक माना गया है। इसके अलावा लखनऊ, प्रयागराज, गोंडा, सीतापुर और वाराणसी के कई लोगों के नाम भी जांच में सामने आए हैं। उधर, लखनऊ केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने पूरे गिरोह के सरगनाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि नकली दवाओं का बढ़ता कारोबार सरकार और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है तथा आम लोगों के लिए असली और नकली दवाओं की पहचान करना बेहद मुश्किल है।


