– आठ साल पुराने चर्चित जानलेवा हमले में अदालत का कड़ा फैसला, प्रत्येक पर ₹15,500 का जुर्माना भी
– न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की अदालत का न्याय
फर्रुखाबाद। आठ वर्ष पहले मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के रकाबगंज कलां में गोलियों की तड़तड़ाहट से दहशत फैलाने वाले पिता-पुत्र समेत चार हिस्ट्रीशीटर अपराधियों को आखिरकार कानून ने उनके अंजाम तक पहुंचा दिया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की अदालत ने चारों दोषियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और 15,500-15,500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। कचहरी फतेहगढ़ में एडीजे मनोज कुमार तिवारी की अदालत के इस सराहनीय फैसले की प्रशंसा हो रही है।
अभियोजन के अनुसार, 19 अप्रैल 2018 को बच्चों के विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। आरोप है कि टार्जन, अमित उर्फ मल्टू, सुभाष और विक्की गिहार ने बीच बाजार असलहे निकाल लिए और विरोध करने पर ताबड़तोड़ करीब 17 राउंड फायरिंग कर दी। गोली लगने से सुशील कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जबकि पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत फैल गई थी।
पीड़ित पक्ष की तहरीर पर हत्या के प्रयास समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन ने गवाहों, चिकित्सीय साक्ष्यों और अन्य प्रमाणों के आधार पर आरोप सिद्ध किए। अदालत ने सभी साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद चारों आरोपियों को दोषी करार दिया।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि दोषियों का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है और उनके विरुद्ध पहले से कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। अदालत ने इसे गंभीर मानते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि कानून हाथ में लेने वालों के लिए न्याय व्यवस्था सख्त रुख अपनाएगी।
यह फैसला केवल चार दोषियों को सजा भर नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि वर्षों बाद ही सही, लेकिन न्याय का पहिया चलता है और कानून की पकड़ से अपराधी बच नहीं सकते। लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले ने पीड़ित परिवार को राहत और न्याय व्यवस्था पर भरोसा दोनों दिया।
खूंखार अपराधियों का लंबा आपराधिक इतिहास
अदालत के समक्ष सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि दोषी ठहराए गए चारों अभियुक्त शातिर और हिस्ट्रीशीटर अपराधी हैं। टार्जन के खिलाफ 21, अनिल उर्फ मलतू के खिलाफ 15, उसके पिता सुभाष के खिलाफ 24 तथा साथी विक्की गिहार के खिलाफ 18 गंभीर आपराधिक मुकदमे पहले से दर्ज हैं। इनमें हत्या, जानलेवा हमला, दुष्कर्म, लूट, मारपीट और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे संगीन अपराध शामिल हैं। 16 जुलाई को अंतिम सुनवाई के दौरान एडीजीसी अखिलेश कुमार सिंह की दलीलें सुनने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी ने चारों को जानलेवा हमला और दहशत फैलाने के मामले में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।


