केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम मथुरा के वैज्ञानिकों ने बकरियों के लिए विशेष रेडिमेड फीड तैयार किया है। हरे चारे की कमी को देखते हुए विकसित किया गया यह आहार बकरियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उनका वजन तेजी से बढ़ाने में भी मदद करेगा। वैज्ञानिकों का दावा है कि इस फीड के इस्तेमाल से बकरी पालकों को अधिक मुनाफा मिलेगा। संस्थान ने इस उत्पाद को बाजार में उतारने के लिए मुंबई और इंदौर की कंपनियों से करार भी किया है।
संस्थान के पशु पोषण विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि बकरियों में प्रोटोजोआ परजीवी के कारण होने वाली कोक्सीडियोसिस बीमारी से बचाव के लिए “काक्सीचेक एच” नामक रेडिमेड फीड तैयार किया गया है। यह बीमारी दूषित चारा और गंदा पानी पीने से फैलती है, जिससे बड़ी संख्या में बकरियां प्रभावित होती हैं। इस विशेष फीड में अनाज, खली, चोकर, मिनरल मिक्सचर और दलहन भूसा के साथ औषधीय पौधों के अर्क मिलाए गए हैं, जो परजीवियों को खत्म करने में मदद करते हैं और बकरियों को स्वस्थ बनाए रखते हैं।
वैज्ञानिकों ने “मेथलो एच” नाम का एक और रेडिमेड फीड भी विकसित किया है, जो बकरियों से निकलने वाली मिथेन गैस को कम करता है। वैज्ञानिकों के अनुसार मिथेन गैस ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने में कार्बन डाइऑक्साइड से 21 गुना अधिक प्रभावी मानी जाती है। इस फीड में भी औषधीय पौधों के अर्क का उपयोग किया गया है। इससे न केवल बकरियों का वजन बढ़ता है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।
इसके अलावा दूध देने वाली बकरियों के लिए मोरिंगा आधारित संपूर्ण आहार भी तैयार किया गया है। परीक्षण में पाया गया कि इसके सेवन से बकरियों के दूध उत्पादन में 15 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि हुई। यह आहार थनैला रोग से बचाव में भी सहायक साबित हुआ है। संस्थान के निदेशक डॉ. मनीष कुमार चेटली ने बताया कि यह तकनीक बकरी पालन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस फीड की लागत फिलहाल 16 से 18 रुपये प्रति किलो है, जो बड़े स्तर पर उत्पादन होने पर और कम हो सकती है।


