संपादकीय |
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में दिया गया संबोधन भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, तकनीकी क्षमता और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को रेखांकित करता है। सस्ती दवाओं से लेकर प्रतिभा और तकनीक तक, भारत को दुनिया के लिए एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में प्रस्तुत करना देश की बदलती अंतरराष्ट्रीय छवि का संकेत है। शून्य के योगदान का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने यह संदेश देने की कोशिश की कि भारत की सभ्यता और ज्ञान परंपरा सदियों से पूरी मानवता के लिए उपयोगी रही है।
कोविड-19 महामारी के दौरान 100 से अधिक देशों तक वैक्सीन पहुंचाने का उल्लेख भारत की वैश्विक स्वास्थ्य संबंधी भूमिका को सामने लाता है। आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऊर्जा, खनिज संसाधनों और आपूर्ति शृंखला की सुरक्षा जैसे विषय विश्व अर्थव्यवस्था की दिशा तय कर रहे हैं। ऐसे दौर में भारत के लिए आवश्यक है कि वह अपनी तकनीकी क्षमता, कुशल मानव संसाधन और आर्थिक संभावनाओं का इस्तेमाल केवल राष्ट्रीय विकास तक सीमित न रखे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी मजबूत करे।
प्रधानमंत्री ने पिछले एक दशक में 25 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर निकलने, 7.8 प्रतिशत विकास दर और 700 अरब डॉलर से अधिक के विदेशी मुद्रा भंडार का उल्लेख कर आर्थिक प्रगति की तस्वीर पेश की। सस्ते मोबाइल डेटा, ऑनलाइन शिक्षा और छोटे शहरों में स्टार्टअप के विस्तार ने निश्चित रूप से नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। हालांकि, विकास के इन आंकड़ों की वास्तविक सफलता का आकलन तभी होगा, जब इनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। रोजगार के पर्याप्त अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती भी विकास के महत्वपूर्ण पैमाने हैं।
भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए प्रधानमंत्री ने शासन का उद्देश्य लोगों को सशक्त बनाना बताया। यह विचार तभी सार्थक होगा, जब पारदर्शिता, जवाबदेही और समान अवसर शासन व्यवस्था की बुनियाद बनें। आर्थिक विकास के साथ सामाजिक न्याय और नागरिक अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।
वास्तव में, वैश्विक मंचों पर भारत की प्रतिष्ठा केवल प्रभावशाली भाषणों या आर्थिक आंकड़ों से नहीं, बल्कि देश के भीतर हासिल किए गए ठोस परिणामों से मजबूत होगी। दुनिया का भरोसा बनाए रखने के लिए भारत को नवाचार, शिक्षा, रोजगार, समावेशी विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर लगातार काम करना होगा। भारत की असली शक्ति तभी सामने आएगी, जब उसकी प्रगति देश के प्रत्येक नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी और वैश्विक समुदाय के लिए भी नए अवसर पैदा करेगी।


