फर्रुखाबाद। जिले के एआरटीओ कार्यालय में कथित भ्रष्टाचार और दलालों की सक्रियता को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। सरकारी फाइलों तक बाहरी लोगों की पहुंच और रुपये के लेन-देन के दृश्य होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, शाम करीब चार बजे के बाद कार्यालय में दलालों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं और कुछ लोग लिपिकों के केबिन में बैठकर फाइलों से जुड़े काम करते नजर आते हैं।
स्टिंग रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बाहरी लोग सरकारी रैक से फाइलें निकालते और रखते हैं। कुछ लोगों को 500-500 रुपये के नोटों का लेन-देन करते हुए भी दिखाए जाने की बात कही गई है। आरोप है कि लाइसेंस, वाहन फिटनेस, परमिट और ट्रांसफर जैसे कार्यों के लिए आवेदकों को बिचौलियों के माध्यम से काम कराना पड़ता है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी।
कार्यालय में सीसीटीवी कैमरे बंद रहने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इससे कार्यालय की निगरानी व्यवस्था और सरकारी अभिलेखों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह जांच का विषय है कि कैमरे किन परिस्थितियों में बंद थे और बाहरी लोगों को केबिन में प्रवेश कैसे मिला।
एआरटीओ प्रशासन कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि लिपिकों के केबिन में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश और उनके द्वारा सरकारी फाइलें उठाना या रुपये का लेन-देन करना गलत है। उन्होंने मामले में कठोर कार्रवाई करने की बात कही है।
अब इस प्रकरण में स्टिंग फुटेज की जांच, संबंधित कर्मचारियों की भूमिका और कथित लेन-देन की वास्तविकता स्पष्ट होना जरूरी है। जांच के बाद ही पता चलेगा कि कार्यालय में कथित अनियमितताओं के लिए कौन जिम्मेदार है और विभाग क्या कार्रवाई करता है।
एआरटीओ कार्यालय में दलालों का बोलबाला, अवैध वसूली का दावा


