आगे कटौती की राह भी बंद
नई दिल्ली। महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच रिजर्व बैंक ने करीब चार साल बाद रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। आरबीआई ने रेपो रेट 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन चली बैठक के बाद बुधवार को गवर्नर संजय मल्होत्रा ने यह फैसला घोषित किया। फरवरी 2023 के बाद पहली बार रेपो रेट बढ़ाया गया है। फैसले का सीधा असर बैंक से कर्ज लेने वाले ग्राहकों पर पड़ सकता है और आने वाले दिनों में होम, कार तथा व्यक्तिगत ऋण महंगे हो सकते हैं।
आरबीआई ने महंगाई को लेकर भी चिंता जताई है। वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई दर का अनुमान 5.0% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया गया है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, वैश्विक परिस्थितियों और खराब मौसम के कारण खाद्य महंगाई का जोखिम बढ़ा है। इसी दबाव को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दर बढ़ाने का फैसला किया गया है।
आरबीआई ने अपना रुख भी बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। इसका संकेत साफ है कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है। आने वाली बैठकों में केंद्रीय बैंक दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रख सकता है या महंगाई का दबाव बढ़ने पर फिर बढ़ोतरी कर सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक आगे 0.25 से 0.50 प्रतिशत तक और बढ़ोतरी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
कर्जदारों पर सीधा असर
रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को अल्प अवधि के लिए कर्ज देता है। जब यह दर बढ़ती है तो बैंकों के लिए पैसा महंगा होता है और इसका असर ग्राहकों के कर्ज पर पड़ता है। फ्लोटिंग ब्याज दर वाले होम, कार और व्यक्तिगत ऋण की ईएमआई बढ़ सकती है या बैंक लोन की अवधि बढ़ा सकते हैं। नए कर्ज लेने वालों के लिए भी उधार महंगा होने की संभावना है।
आरबीआई के मुताबिक करीब 10 में से 7 कर्ज ग्राहकों की ब्याज दर रेपो रेट से जुड़ी है। ऐसे में मौजूदा कर्जदारों पर इसका असर अपेक्षाकृत जल्दी दिखाई दे सकता है। घर या कार खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी बैंक की नई ब्याज दरें लागू होने के बाद कर्ज लेना महंगा पड़ सकता है और उनकी कर्ज लेने की क्षमता कुछ कम हो सकती है।
विकास दर का अनुमान बढ़ाया
महंगाई पर सख्ती के बीच आरबीआई ने अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरा अनुमान भी दिया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया गया है। दूसरी तिमाही में 7.2%, तीसरी तिमाही में 6.9% और चौथी तिमाही में 6.8% वृद्धि का अनुमान है। केंद्रीय बैंक का संकेत है कि महंगाई के जोखिम के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है।
रेपो रेट बढ़ाने का मूल उद्देश्य अर्थव्यवस्था में मांग और पैसों के प्रवाह को नियंत्रित कर महंगाई पर लगाम लगाना है। महंगा कर्ज होने पर लोग कम उधार लेते हैं और खर्च में कमी आती है, जिससे मांग का दबाव घटता है। आरबीआई अब महंगाई और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन बनाते हुए आगे की मौद्रिक नीति तय करेगा।


