शरद कटियार
आज का युवा प्रतिभावान है, महत्वाकांक्षी है और अपने लिए एक अलग पहचान बनाने का सपना देखता है। यह अच्छी बात है। लेकिन चिंता तब पैदा होती है, जब पहचान बनाने की यह दौड़ उसे अपनी हकीकत, अपने फर्ज, अपने दायित्व और अपने अपनों से दूर कर देती है।
आज का एक वर्ग बाहरी चकाचौंध में इतना उलझ गया है कि उसे दिखने वाली दुनिया ही वास्तविक लगने लगी है। सोशल मीडिया की आभासी लोकप्रियता, दिखावा, महंगे शौक और दूसरों से आगे निकलने की होड़ में वह भूल जाता है कि असली सफलता केवल इस बात से नहीं तय होती कि लोग आपको कितना जानते हैं, बल्कि इससे तय होती है कि आप किन लोगों की वजह से यहां तक पहुंचे और उनके प्रति आपका व्यवहार कैसा है।
सबसे बड़ी विडंबना तब सामने आती है, जब कोई व्यक्ति जिस इंसान की उंगली पकड़कर चलना सीखता है, उसी के बड़ा होते ही उसकी कमियां गिनाने लगता है। जिसने संघर्ष के दिनों में साथ दिया, अवसर दिया, रास्ता दिखाया और पहचान बनाने में मदद की, उसी के प्रति सम्मान समाप्त हो जाता है।
जिस सीढ़ी से ऊपर चढ़ा, उसी सीढ़ी को कमजोर समझने की भूल अक्सर इंसान को ऊंचाई पर नहीं, बल्कि अकेलेपन की ओर ले जाती है।
अपनी पहचान बनाना गलत नहीं है। हर युवा को आगे बढ़ना चाहिए, अपने सपनों को पूरा करना चाहिए और अपनी स्वतंत्र पहचान कायम करनी चाहिए। लेकिन अपनी पहचान बनाने के लिए अपनी जड़ों को काट देना समझदारी नहीं है।
जिस व्यक्ति, परिवार, संस्था या समाज ने आपके निर्माण में भूमिका निभाई, उसके प्रति कृतज्ञता कमजोरी नहीं, बल्कि संस्कार है। मतभेद हो सकते हैं, विचार अलग हो सकते हैं, रास्ते अलग हो सकते हैं,लेकिन अपमान और कृतघ्नता कभी सफलता की पहचान नहीं हो सकती।
ऐसे युवा का भविष्य क्या होगा जो हर रिश्ते को अपने स्वार्थ की नजर से देखता है? जो लाभ मिलने तक लोगों को अपना मानता है और लाभ समाप्त होते ही उन्हीं में दोष तलाशने लगता है? जो अपने निर्माण में योगदान देने वालों का सम्मान नहीं कर सकता, वह आगे चलकर अपने साथ खड़े होने वालों को भी स्थायी रूप से साथ नहीं रख पाएगा।
क्योंकि जीवन केवल उपलब्धियों से नहीं चलता, विश्वास, रिश्तों और चरित्र से भी चलता है।
आज जरूरत है कि युवा बाहरी चकाचौंध के बजाय अपने भीतर झांके। वह खुद से पूछे—
मैं जहां हूं, वहां पहुंचने में किन लोगों का योगदान है?
क्या मैं अपने फर्ज और दायित्व निभा रहा हूं?क्या मेरी सफलता के साथ मेरा चरित्र भी बड़ा हो रहा है?
याद रखिए, पहचान बनाना बड़ी बात नहीं है। उस पहचान को सम्मान के साथ बनाए रखना बड़ी बात है।जिसने आपको आगे बढ़ाया, उसका सम्मान कीजिए।
जिसने मुश्किल वक्त में हाथ थामा, उसे आसान वक्त में मत भूलिए।और जिन रिश्तों ने आपके व्यक्तित्व का निर्माण किया, उन्हें अपनी सफलता की कीमत मत बनाइए।क्योंकि चमक कुछ समय के लिए आंखों को आकर्षित कर सकती है, लेकिन चरित्र ही वह रोशनी है जो पूरी जिंदगी रास्ता दिखाती है।
भटका युवा: चमक के पीछे भागता भविष्य


