50 हजार से एक लाख तक की रकम मांगने की चर्चा
फर्रुखाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग में 15 एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) के चयन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही ब्लॉक आवंटन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। लिखित परीक्षा में शामिल 32 शिक्षकों में 26 के उत्तीर्ण होने के बाद अब इंटरव्यू के माध्यम से 15 शिक्षकों का चयन होना है। इसी बीच आरोप है कि दूरस्थ ब्लॉकों में तैनात शिक्षकों को मनचाहे और मुख्यालय के नजदीकी ब्लॉक में तैनाती दिलाने के नाम पर 50 हजार से एक लाख रुपये तक की रकम बसूली गयी है।
सूत्रों का दावा है कि इंटरव्यू में चयन प्रक्रिया के साथ-साथ ब्लॉक आवंटन को लेकर भी सौदेबाजी का खेल चल रहा है। विभागीय प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही कुछ नामों को लेकर चयन और मनचाहा ब्लॉक मिलने की चर्चाओं ने पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विभागीय सूत्रों के हवाले से राजेपुर के बलवीर सिंह, कायमगंज के संदीप हर्षवर्धन, मोहम्मदाबाद के मनीष अवस्थी और बढ़पुर के गंगेश शुक्ला के नाम संभावित चयन को लेकर चर्चा में बताए जा रहे हैं। आरोप यह भी है कि कुछ शिक्षकों के लिए उनके पसंद के ब्लॉक में तैनाती की व्यवस्था कराने की बात कही जा रही है।
एक अधिकारी के करीबी बताए जा रहे व्यक्ति ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर आरोप लगाया कि कई शिक्षकों से रकम की मांग की जा रही है। उसका दावा है कि यदि जिलाधिकारी गोपनीय तरीके से जांच कराएं और स्वतंत्र रूप से जानकारी ली जाए तो पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है।
वहीं, एक अन्य करीबी सूत्र ने दावा किया कि 15 संभावित चयनित शिक्षकों में से 12 से संबंधित रकम जमा होने की बात कही जा रही है, जबकि तीन लोगों को लेकर लेनदेन पूरा नहीं होने के कारण अंदरखाने उठापटक चल रही है। और जो ठेकेदार पैसे वसूल रहा है उसका कहना है कि इंटरव्यू लेने वाले सभी अधिकारियों से वह सेटिंग स्वयं करेगा ।सूत्रों के मुताबिक वसूली का केंद्र बिंदु राजेपुर ब्लॉक का एक शिक्षक बताया जा रहा है। यदि यह आरोप सही है तो मामला केवल एआरपी चयन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चयन के बाद ब्लॉक आवंटन की निष्पक्षता और विभागीय व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े होंगे।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 15 एआरपी का अंतिम चयन अभी प्रक्रिया में है, तो संभावित चयनित शिक्षकों और उनके मनचाहे ब्लॉकों को लेकर पहले से चर्चाएं कैसे शुरू हो गईं, जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा यदि अभ्यर्थियों से गोपनीय पूछताछ, कॉल डिटेल लेनदेन से जुड़े उपलब्ध साक्ष्यों तथा ब्लॉक आवंटन की प्रक्रिया की जांच कराई जाती है, तो आरोपों की सच्चाई सामने आ सकती है। फिलहाल विभागीय स्तर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


