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Friday, October 2, 2026

फर्जी बैनामे और जमीन कब्जे के आरोप में 11 नामजद समेत अज्ञात पर एफआईआर

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पूरामुफ्ती थाने में दर्ज हुआ मुकदमा, अतीक अहमद के करीबियों से जुड़े लोगों पर आरोप

प्रयागराज। जमीनों के कथित फर्जी बैनामे और कब्जे से जुड़े मामले में पूरामुफ्ती थाने में 11 नामजद आरोपियों समेत कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि धूमनगंज और पूरामुफ्ती क्षेत्र में जमीनों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैनामा कराने के साथ सरकारी और पुश्तैनी जमीनों पर भी कब्जे किए गए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता शाह फैसल की ओर से पुलिस उपायुक्त नगर के समक्ष शिकायत की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ लोगों ने जमीन के वास्तविक क्षेत्रफल से अधिक हिस्से का कथित तौर पर फर्जी बैनामा कराया और बाद में नामांतरण कराने का प्रयास किया। मामले में जमीनों से संबंधित दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों की जांच की जा रही है।
मुकदमे में नामजद लोगों में मोहम्मद जैद खालिद, जसीम अहमद, जाफर अहमद, मोहम्मद राशिद उर्फ नीलू, मुमताज अहमद, राहिल सिद्दीकी, महमूद अख्तर, अबु जैद, धीरेंद्र प्रताप सिंह और मोहम्मद दानिश समेत अन्य के नाम सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार शिकायत में इन लोगों पर जमीन संबंधी फर्जीवाड़े और कब्जे के आरोप लगाए गए हैं।
जैद खालिद को पूर्व में माफिया अतीक अहमद के करीबी बताए जाने वाले आबिद प्रधान का दामाद बताया गया है। सितंबर 2026 में पूरामुफ्ती क्षेत्र में जैद खालिद से जुड़ी बताई गई एक कथित अवैध गौशाला पर प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने कार्रवाई भी की थी।
शिकायत में ग्रामसभा, बंजर और नाले की जमीन पर कथित कब्जे का भी आरोप लगाया गया है। इसके अलावा शिकायतकर्ता ने अपनी पुश्तैनी जमीन पर भी कब्जे का आरोप लगाया है। पुलिस अब राजस्व विभाग के अभिलेखों और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच के आधार पर आरोपों की वास्तविकता पता करेगी।
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों, बैनामों और राजस्व रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जांच में यह देखा जाएगा कि संबंधित जमीनों का वास्तविक स्वामित्व किसके नाम था, बैनामे किस आधार पर हुए और जिन जमीनों को सरकारी या ग्रामसभा की बताया गया है, उनका राजस्व अभिलेखों में क्या दर्ज है।
मामले में लगाए गए आरोप अभी जांच का विषय हैं। पुलिस की जांच और राजस्व अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही आरोपों की पुष्टि की स्थिति स्पष्ट होगी।

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