लखनऊ। बारिश थमने के बावजूद उत्तर प्रदेश में नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई जिलों में बाढ़ के हालात बने हुए हैं। गंगा, घाघरा, सरयू, शारदा समेत कई नदियां खतरे के निशान के आसपास या ऊपर बह रही हैं। लखनऊ, गोंडा, बाराबंकी, उन्नाव, मऊ, बलिया और मुरादाबाद समेत 14 जिलों में बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है। निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
गोंडा में घाघरा नदी खतरे के निशान से 26 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। करीब 30 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं और 25 हजार से अधिक आबादी पानी से घिरी है। कई गांवों में सड़कें डूबने से आवागमन नावों के सहारे हो रहा है। बाढ़ के पानी में डूबने से दो लोगों की मौत भी हुई है। मुजेहना के बालिका विद्यालय में करीब दो फीट पानी भरने के बाद स्कूल बंद कर दिया गया है।
लखनऊ में गोमती और सई नदी का जलस्तर बढ़ने से इटौंजा और सरोजनीनगर क्षेत्र के कई गांव प्रभावित हैं। करीब 20 हजार लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। कई संपर्क मार्ग जलमग्न हैं और ग्रामीणों को नाव से आवाजाही करनी पड़ रही है। उन्नाव में सई नदी के उफान से सैकड़ों बीघा फसल डूब गई है, जबकि तेज बहाव में सड़क का हिस्सा बह गया है।
बाराबंकी के हेतमापुर में सरयू नदी का कटान तेज है। नदी की धारा में मस्जिद का हिस्सा समा गया, जबकि मंदिर का एक हिस्सा भी कटान की जद में आ गया है। मऊ में घाघरा का पानी बस्तियों में पहुंचने के बाद कई परिवारों को स्कूल में सुरक्षित स्थान दिया गया है। बलिया में गंगा और सरयू खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी पहुंच गया है।
मुरादाबाद में गांगन नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी आबादी तक पहुंच गया है। वहीं वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर तक पहुंच गया है। प्रदेश में मानसूनी सीजन 30 सितंबर को समाप्त हो गया, लेकिन नदियों में पहाड़ी और ऊपरी क्षेत्रों से आ रहे पानी के कारण बाढ़ का असर बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस साल प्रदेश में सामान्य से करीब आठ प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।


