प्रयागराज। ब्राह्मणों की उपजाति को लेकर कथित टिप्पणी से जुड़े मामले में जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर मामला अदालत तक पहुंच गया है। शिकायतकर्ता सुरेश चंद्र उपाध्याय की ओर से दाखिल याचिका में कथित टिप्पणी को लेकर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की गई है।
हालांकि, उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक संबंधित याचिका पर 1 सितंबर 2026 को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार किया था। अदालत ने कहा था कि प्राथमिकी दर्ज न होने की स्थिति में याचिकाकर्ता को पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(3) के तहत संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रभावी वैधानिक उपाय अपनाना चाहिए। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कानून के तहत उचित उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी थी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्वामी रामभद्राचार्य की कथित टिप्पणी से एक विशेष समुदाय के लोगों की भावनाएं आहत हुईं। याचिकाकर्ता ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं होने के बाद न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई।
मामले में यह अंतर महत्वपूर्ण है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग और अदालत द्वारा वास्तव में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दो अलग बातें हैं। उपलब्ध हाईकोर्ट आदेश में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश नहीं दिया गया है। अदालत ने वैकल्पिक कानूनी प्रक्रिया अपनाने की छूट दी है।


