– सावन बरवाल ने रचा इतिहास
– 1982 के बाद पहली बार पुरुष मैराथन में भारत की पदक वापसी
– राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी बरवाल का शानदार प्रदर्शन
खेल डेस्क। भारतीय एथलेटिक्स के लिए शनिवार का दिन ऐतिहासिक रहा। सावन बरवाल ने एशियाई खेलों की पुरुष मैराथन में भारत को पदक दिलाकर 44 साल का इंतजार खत्म कर दिया। इससे पहले भारत ने पुरुष मैराथन में आखिरी बार 1982 के नई दिल्ली एशियाई खेलों में पदक जीता था। उस प्रतियोगिता में होसुर कुक्कप्पा सीताराम ने कांस्य पदक हासिल किया था।
हिमाचल प्रदेश के 28 वर्षीय सेना धावक सावन बरवाल पहले ही इसी वर्ष इतिहास रच चुके हैं। अप्रैल में रॉटरडैम मैराथन में उन्होंने 2 घंटे 11 मिनट 58 सेकंड का समय निकालकर शिवनाथ सिंह का 1978 से कायम 2:12:00 का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था। यह उनकी पहली प्रतिस्पर्धी मैराथन भी थी।
बरवाल का रॉटरडैम प्रदर्शन उन्हें एशियाई खेलों के लिए योग्य बनाने में भी महत्वपूर्ण रहा। प्रतियोगिता से पहले उन्होंने कहा था कि एशियाई खेलों में उनका मुख्य ध्यान समय से अधिक पदक की दौड़ पर रहेगा।
भारतीय एथलेटिक्स महासंघ के अनुसार, एशियाई खेलों में पुरुष मैराथन में भारत के पिछले पदक 1982 में आए थे। इससे पहले 1951 के नई दिल्ली एशियाई खेलों में छोटा सिंह ने स्वर्ण और सुरत सिंह माथुर ने कांस्य पदक जीता था।
सावन बरवाल के इस प्रदर्शन से भारतीय लंबी दूरी की दौड़ को नई पहचान मिली है। राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने के बाद अब एशियाई मंच पर पदक हासिल करना उनके करियर की एक और बड़ी उपलब्धि बन गया है।


