पांचाल घाट पर प्रशासन ने खुदवाए गड्ढे
फर्रुखाबाद। गणेश महोत्सव के बीच जिले में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शुरू हो गया है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक गणपति की प्रतिमाओं के साथ श्रद्धालुओं की ओर से शोभायात्राएं निकाली जा रही हैं। शोभायात्राओं के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिमाओं को लेकर पांचाल घाट पहुंच रहे हैं। गंगा की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं से गंगा में प्रतिमाओं का विसर्जन करने के बजाय भू-विसर्जन करने की अपील की है।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के निर्देश पर पांचाल घाट पर प्रशासन की ओर से भू-विसर्जन के लिए निर्धारित स्थान चिह्नित किया गया है। यहां जेसीबी की मदद से गड्ढे खुदवाए गए हैं, जहां श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए गणेश प्रतिमाओं का भू-विसर्जन कराया जा रहा है। प्रशासन की इस व्यवस्था का उद्देश्य गंगा में प्रतिमाओं के विसर्जन से होने वाले संभावित प्रदूषण को रोकना और श्रद्धालुओं को विसर्जन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
जिले में गणेश महोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। विभिन्न स्थानों पर गणपति की स्थापना के बाद प्रतिदिन पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और शोभायात्राओं का आयोजन किया जा रहा है। विसर्जन के लिए निकलने वाली यात्राओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। पांचाल घाट पर भी दिनभर प्रतिमाओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है।
डीएम डॉ. अंकुर लाठर ने श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा कि गंगा हमारी आस्था के साथ-साथ जीवनदायिनी नदी भी है। इसलिए गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन गंगा में करने के बजाय प्रशासन की ओर से तैयार कराए गए निर्धारित गड्ढों में ही किया जाए। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रशासन की व्यवस्था में सहयोग करने और गंगा को प्रदूषण से बचाने की अपील की है।
बुधवार को भी कई गणेश प्रतिमाएं शोभायात्राओं के साथ पांचाल घाट पहुंचीं। यहां प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में प्रतिमाओं का निर्धारित स्थान पर भू-विसर्जन कराया गया। श्रद्धालुओं को गंगा के मुख्य प्रवाह में प्रतिमा विसर्जित करने से रोकते हुए भू-विसर्जन के लिए बनाए गए गड्ढों की ओर भेजा गया। प्रशासन की ओर से घाट पर व्यवस्था बनाए रखने के साथ श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील भी की जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि गणेश महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए विसर्जन की व्यवस्था की गई है। साथ ही गंगा की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित स्थान पर ही प्रतिमाओं का भू-विसर्जन करें और गंगा को स्वच्छ एवं निर्मल बनाए रखने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।


