शरद कटियार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में राजकीय महिला शरणालय के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण करते हुए महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़ा। करीब 8.05 करोड़ रुपये की लागत से बने 100 क्षमता वाले इस शरणालय में निराश्रित, घरेलू हिंसा से प्रभावित तथा परिवार से बिछड़ी महिलाओं को आश्रय और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री के भाषण का एक बड़ा हिस्सा 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था और वर्तमान उत्तर प्रदेश की तुलना पर केंद्रित रहा। उन्होंने सपा सरकार के दौर को लेकर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उस समय महिलाओं और बेटियों के सामने सुरक्षा की चुनौती थी। दूसरी ओर, वर्तमान सरकार के कार्यकाल को उन्होंने कानून-व्यवस्था में बदलाव और महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित वातावरण से जोड़ा। ये राजनीतिक दावे हैं, जिनका आकलन अपराध के आधिकारिक आंकड़ों और अलग-अलग समयावधियों के तुलनात्मक आंकड़ों के आधार पर किया जाना अधिक उचित होगा।
इस पूरे प्रसंग का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष राजनीतिक बयानबाजी से आगे महिलाओं के लिए वास्तविक संस्थागत सहारे का निर्माण है। घरेलू हिंसा, पारिवारिक विघटन, निराश्रयता या सामाजिक संकट की स्थिति में किसी महिला को सुरक्षित छत, भोजन, चिकित्सा, परामर्श और पुनर्वास जैसी सुविधाएं मिलना सामाजिक सुरक्षा की बुनियादी जरूरत है। नए शरणालय में डारमेट्री, अध्ययन कक्ष, रोगी कक्ष, क्रेच, भोजन कक्ष, रसोई और अन्य सुविधाओं का प्रावधान किया गया है।
सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बेटियों की शिक्षा से लेकर विवाह और स्वावलंबन तक विभिन्न योजनाओं को गिनाया। लखपति दीदी, ड्रोन दीदी और बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी जैसे उदाहरण यह संकेत देते हैं कि महिला कल्याण की चर्चा अब केवल संरक्षण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सम्मान का अगला चरण आर्थिक आत्मनिर्भरता है। जब महिला के पास शिक्षा, कौशल, रोजगार और अपनी आय का साधन होता है तो उसके निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत होती है।
रोजगार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मिशन रोजगार के तहत साढ़े नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है और प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयों के माध्यम से तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इन आंकड़ों के साथ एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि रोजगार की गुणवत्ता, नियमितता, आय और युवाओं की बढ़ती आकांक्षाओं के अनुरूप अवसरों का विस्तार किस गति से हो रहा है।
गोरखपुर में महिला शरणालय के साथ निर्माणाधीन राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) का निरीक्षण भी इस व्यापक सामाजिक जिम्मेदारी की ओर ध्यान खींचता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार किशोर गृह की क्षमता 100 है और इसके निर्माण पर करीब 14.87 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
इंसेफेलाइटिस, सड़क संपर्क, रोजगार और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को एक साथ रखकर मुख्यमंत्री ने सरकार के विकास मॉडल को प्रस्तुत किया। लेकिन किसी भी सरकार के काम का अंतिम मूल्यांकन केवल मंच से किए गए दावों से नहीं, बल्कि आंकड़ों, जमीनी अनुभव और योजनाओं के वास्तविक लाभार्थियों की स्थिति से होना चाहिए।
महिला शरणालय का लोकार्पण निश्चित रूप से एक सार्वजनिक सुविधा के विस्तार का अवसर है। अब इसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि संकट में पहुंचने वाली महिलाओं को यहां कितना सुरक्षित वातावरण मिलता है, उन्हें कितनी प्रभावी कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता मिलती है और कितनी महिलाओं का सफल पुनर्वास हो पाता है।
सियासत अपने स्थान पर है, लेकिन महिला सुरक्षा का सवाल दलों की सीमाओं से बड़ा है। सरकार किसी भी दल की हो, जनता की अपेक्षा एक ही है,बेटी को सुरक्षा, महिला को सम्मान और संकट में पड़े परिवार को समय पर सहारा मिले।


