
पांच लाख मांगने का आरोप,हाईकोर्ट पहुंचा मामला
पिता का दावा मारपीट कर धमकाया, बेटी को जेल भेजने की दी चेतावनी
23 अगस्त को लापता हुई थी 13 वर्षीय बेटी, कानपुर से बरामदगी के बाद पुलिस पर कार्रवाई में टालमटोल का आरोप
फर्रुखाबाद। शमसाबाद थाना क्षेत्र में 13 वर्षीय नाबालिग बेटी के अपहरण और बरामदगी का मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। सरायपुर नगरिया मुरली नगर निवासी सुखवीर पुत्र बालक राम ने थाना प्रभारी सचिन चौधरी समेत पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए उच्चाधिकारियों से शिकायत की है। पिता का आरोप है कि बेटी की बरामदगी के बाद पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय उसके साथ मारपीट की, धमकाया और पांच लाख रुपये की मांग की। मामले में पीड़ित पिता ने हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक उसकी करीब 13 वर्षीय बेटी 23 अगस्त को संजय नामक युवक के साथ चली गई थी। पिता का आरोप है कि बेटी घर से करीब 50 हजार रुपये नकद तथा सोने-चांदी के आभूषण भी ले गई थी। काफी तलाश के बाद कानपुर सेंट्रल स्टेशन के पास एक अस्पताल में बेटी के होने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस की मदद से उसे बरामद कराया गया और 24 अगस्त को उसे लेकर फर्रुखाबाद पहुंचा गया।
पिता का आरोप है कि बेटी की बरामदगी के बाद भी थाने में तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। शिकायत में थाना प्रभारी सचिन चौधरी, दरोगा महेंद्र सिंह और ड्यूटी पर तैनात महिला सिपाही पर मारपीट करने, धमकाने और दबाव बनाकर बयान बदलवाने का आरोप लगाया गया है। पिता का कहना है कि उसे बेटी को जेल भेजने की धमकी देकर भयभीत किया गया।
सबसे गंभीर आरोप पांच लाख रुपये की कथित मांग को लेकर लगाया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि थाना प्रभारी की ओर से पांच लाख रुपये देने पर ही बेटी को जेल जाने से बचाने की बात कही गई। पिता ने यह भी आरोप लगाया कि उच्चाधिकारियों से शिकायत करने पर उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
शिकायत के अनुसार दबाव के बाद पुलिस ने अपने हिसाब से प्रार्थना पत्र लिखवाकर उस पर हस्ताक्षर कराए और इसके बाद अपराध संख्या 157/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) में मुकदमा दर्ज किया गया। पिता ने सवाल उठाया कि जब नाबालिग की बरामदगी कानपुर क्षेत्र से हुई तो कार्रवाई में क
देरी क्यों की गई।
हाईकोर्ट में याचिका दायर होने के बाद मामले की गंभीरता बढ़ गई है। पीड़ित पिता ने थाना प्रभारी सचिन चौधरी, दरोगा महेंद्र सिंह और संबंधित महिला सिपाही की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अब पुलिस का आधिकारिक पक्ष और हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में उठाए गए बिंदु मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।


