ईओ दिव्या गुप्ता पर संपत्ति से लेकर खातों तक गंभीर सवाल
अध्यक्ष पुत्र अयान से नजदीकियों को लेकर भी उठी उंगली
कन्नौज। समधन नगर पंचायत की अधिशासी अधिकारी दिव्या गुप्ता को लेकर उठे भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच की मांग अब तेज होती जा रही है। इसी बीच कुछ शिकायतकर्ताओं ने ईओ पर उन्हें हड़काने और शिकायतों से पीछे हटने के लिए दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उन्हें जेल भेजने तक की धमकी दी गई और यह तक कहा गया कि उच्च अधिकारियों से उनकी अच्छी सेटिंग है, इसलिए उनका कुछ नहीं बिगड़ सकता।
जांच की मांग उठने के बाद उन्हें अलग-अलग तरीके से डराने और दबाव में लेने की कोशिश की जा रही है। आरोप है कि शिकायत आगे न बढ़ाने के लिए धमकी भरे तेवर अपनाए जा रहे हैं।
बोली दिव्या : पैसा है, सब निपटा दूंगी
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि ईओ की ओर से प्रभाव और पैसे का हवाला देते हुए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि शिकायतों से उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा। आरोप है कि बातचीत के दौरान यहां तक कहा गया कि उनके पास इतना पैसा है कि वह सब कुछ निपटा सकती हैं। यह जांच प्रक्रिया पर दबाव डालने का भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
समधन नगर पंचायत में ईओ की संपत्तियों, पारिवारिक सदस्यों के खातों, आरटीजीएस लेनदेन, ठेकेदारों के भुगतान और नगर पंचायत के विभिन्न कार्यों को लेकर पहले से ही शिकायतें सामने आ रही हैं। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि छह जनवरी से अब तक के निर्माण कार्यों, खरीद, ठेकों, भुगतान और बैंक लेनदेन का स्वतंत्र स्तर पर परीक्षण कराया जाए।
ईओ और अध्यक्ष पुत्र की नजदीकियों पर भी उठ रहे सवाल
मामले में नगर पंचायत अध्यक्ष के पुत्र अयान सिद्दीकी के साथ ईओ की नजदीकियों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि दोनों के बीच बेहतर तालमेल के कारण नगर पंचायत के कामकाज पर प्रभावी निगरानी और सवाल-जवाब की स्थिति कमजोर हुई है। इसी वजह से शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अब मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहने की बात कही जा रही है। शिकायतकर्ताओं की मांग है कि ईओ की ज्ञात आय और संपत्तियों का मिलान, पारिवारिक सदस्यों के बैंक खातों की जांच, नगर पंचायत के भुगतान अभिलेखों का परीक्षण एक साथ कराई जाए। सवाल यही है कि यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के जरिए स्थिति साफ क्यों न कर दी जाए अब निगाहें शासन और प्रशासन की जांच पर टिकी हैं।


