डॉ. विजय गर्ग
भारत अद्भुत भाषाई विविधता वाला देश है। हिंदी, पंजाबी, बंगाली, तमिल और तेलुगु से लेकर मराठी, गुजराती, मलयालम, कन्नड़, असमिया तथा अनेक अन्य भाषाओं तक, प्रत्येक भाषा अपने भीतर इतिहास, साहित्य, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को संजोए हुए है। यह विविधता हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि भारत की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है।
भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं है। यह मनुष्य को उसके परिवार, समाज, इतिहास और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती है। भारत की प्रत्येक भाषा ने महान कवि, लेखक, चिंतक और विद्वान दिए हैं, जिनकी रचनाओं ने हमारी साझा विरासत को समृद्ध किया है। विभिन्न भाषाएं भारत को ऐसी सांस्कृतिक समृद्धि प्रदान करती हैं, जिसकी दुनिया में बहुत कम मिसालें मिलती हैं।
लेकिन भाषाई विविधता कभी भी विभाजन का कारण नहीं बननी चाहिए। हम अलग-अलग भाषाएं बोल सकते हैं, लेकिन हमारी राष्ट्रीय आकांक्षाएं, संवैधानिक मूल्य और भारत से जुड़े होने की भावना समान रह सकती है। एकता का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक व्यक्ति एक ही भाषा बोले। वास्तविक एकता का अर्थ है विभिन्न भाषाओं का सम्मान करते हुए एक साझा राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करना।
भारत की भाषाई विविधता हमें एक महत्वपूर्ण सीख देती है—विविधता और एकता साथ-साथ चल सकती हैं। हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए, लेकिन दूसरों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं का भी सम्मान करना चाहिए। किसी अन्य भारतीय भाषा को सीखना हमें उस भाषा से जुड़े समाज और संस्कृति को अधिक निकटता से समझने में सहायता कर सकता है।
विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों की इस भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यार्थियों को सभी भारतीय भाषाओं का सम्मान करने और उनसे जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं को समझने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। तकनीक भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, क्योंकि यह विभिन्न भाषाओं में साहित्य और शैक्षिक सामग्री को लोगों तक पहुंचाना आसान बनाती है।
भारत की शक्ति भाषाई एकरूपता में नहीं, बल्कि सामंजस्यपूर्ण विविधता में है। हमारी भाषाओं के शब्द, उच्चारण और लिपियां भले ही अलग हों, लेकिन ये सभी मिलकर राष्ट्रीय एकता के एक ही स्वर को मजबूत कर सकती हैं।
भाषाएं अनेक हो सकती हैं, आवाजें अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन भारत के प्रति हमारी भावना एक होनी चाहिए। भाषाई विविधता हमारी शक्ति है और राष्ट्रीय एकता हमारी पहचान है।
डॉ. विजय गर्ग
सेवानिवृत्त प्रिंसिपल | शैक्षिक स्तंभकार | प्रख्यात शिक्षाविद्
गली कौर चंद, एम.एच.आर. मलोट, पंजाब


