लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के 9.99 लाख करोड़ रुपये के विशाल बजट को जमीन पर उतारने की रफ्तार फिलहाल सुस्त नजर आ रही है। बजट पास हुए करीब पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन सितंबर तक विभाग कुल बजट का महज 22.78 फीसदी ही खर्च कर पाए हैं। कोषवाणी के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर तक सरकार की ओर से करीब 2.27 लाख करोड़ रुपये का वास्तविक खर्च किया गया है। खास बात यह है कि अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और चुनावी अधिसूचना से पहले सरकार अधिक से अधिक परियोजनाओं को धरातल पर उतारना चाहती है।
योगी सरकार ने फरवरी में 9.12 लाख करोड़ रुपये का मूल बजट पेश किया था। इसके बाद अनुपूरक बजट के जरिए कुल प्रस्तावित बजट का आकार बढ़कर 9.99 लाख करोड़ रुपये हो गया। आंकड़ों के अनुसार अब तक विभागों को कुल बजट के सापेक्ष 4.46 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं, जो कुल बजट का 44.64 फीसदी है। इनमें से 3.40 लाख करोड़ रुपये विभागों को आवंटित किए जा चुके हैं, लेकिन वास्तविक खर्च इससे काफी पीछे है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट और अनुपूरक बजट पारित होने के बाद मंत्रियों को नवंबर तक अधिक से अधिक वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने के निर्देश दिए थे। सरकार का मानना है कि चुनावी वर्ष होने के कारण विकास कार्यों और योजनाओं के लिए उपलब्ध समय सीमित रहेगा। ऐसे में विभागों को बजट स्वीकृत कराने के साथ ही धनराशि का समयबद्ध इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया था। शुरुआती दौर में कुछ विभागों ने तेजी दिखाई, लेकिन बाद में खर्च की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी पड़ गई।
हालांकि कुछ विभागों के आंकड़े राहत देने वाले भी हैं। आवास विभाग ने आवंटित धनराशि का करीब 95 फीसदी खर्च किया है। लघु उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग ने आवंटित बजट का 65.40 फीसदी और हथकरघा उद्योग ने 99.25 फीसदी रकम खर्च की है। वहीं कुछ बड़े विभागों की स्थिति भी अपेक्षाकृत बेहतर है। बेसिक शिक्षा में बजट खर्च करीब 38.78 फीसदी, माध्यमिक शिक्षा में 32.14 फीसदी, गृह एवं पुलिस में 33.12 फीसदी, ऊर्जा में 32.74 फीसदी और सहकारिता में 36.60 फीसदी दर्ज किया गया है।
इसके विपरीत कई विभागों का वास्तविक खर्च अभी 10 फीसदी से भी नीचे है। आपदा राहत में महज 3.03 फीसदी, पर्यटन में 2.82 फीसदी, नागरिक उड्डयन में 2.14 फीसदी, जनजाति कल्याण में 4.48 फीसदी, राष्ट्रीय एकीकरण में 5.62 फीसदी, मत्स्य विभाग में 5.62 फीसदी और नियोजन में 5.34 फीसदी खर्च हुआ है। भवन निर्माण मद में लोक निर्माण विभाग का खर्च 9.18 फीसदी, पंचायतीराज का 9.76 फीसदी और नगर विकास का 11.94 फीसदी है। ऐसे में चुनावी वर्ष में विभागों के सामने बचे हुए महीनों में बजट खर्च की रफ्तार बढ़ाने की बड़ी चुनौती है।


