– 2003 से 2026 तक पुलिस रिकॉर्ड में कई मुकदमों का उल्लेख
– 2022 में गैंगस्टर कार्रवाई और अब गाटा संख्या 196 की जमीन पर सवाल
कन्नौज/छिबरामऊ। ग्राम बंधा नगरिया से जुड़ा एक मामला पिछले करीब 23 वर्षों से अलग-अलग कारणों से चर्चा में रहा है। उपलब्ध पुलिस और न्यायालयीय दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2003 से 2026 तक संबंधित व्यक्ति के नाम से विभिन्न मुकदमों का उल्लेख पुलिस रिकॉर्ड में मिलता है। वहीं वर्ष 2022 में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई, बाद में हिस्ट्रीशीट और निरोधात्मक कार्रवाई का भी रिकॉर्ड सामने आया है।
मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष जमीन विवाद से जुड़ा है। मौजा मिर्जापुर की गाटा संख्या 196 को लेकर उपलब्ध विभागीय सामग्री में इसे सिंचाई/नहर विभाग की भूमि बताया गया है। इसी जमीन के कथित बैनामे को लेकर सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में अब मामले की निष्पक्ष और अभिलेख आधारित जांच की मांग उठ रही है।
उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड में सबसे पुरानी प्रविष्टि मु0अ0सं0 72/2003, धारा 307 भादवि, थाना सौरिख के रूप में दर्ज दिखाई देती है। इसके बाद अलग-अलग वर्षों में विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमों का उल्लेख मिलता है।
रिकॉर्ड में धारा 307, 323, 504, 506, 427, 379, 395, 420, 467, 468 और 471 भादवि के साथ आर्म्स एक्ट सहित अन्य धाराओं का उल्लेख दिखाई देता है।
वर्ष 2023 और 2024 की प्रविष्टियों में भी थाना सकरावा से संबंधित मुकदमों और
पुलिस के उपलब्ध प्रेस नोट के अनुसार 14 नवंबर 2022 को थाना सौरिख पुलिस की ओर से गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। इसमें बंधा नगरिया निवासी सुरेंद्र कुमार यादव पुत्र लालता प्रसाद का उल्लेख है।
हालांकि गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई होना अपने आप में न्यायालय द्वारा अपराध सिद्ध होना नहीं है। संबंधित मामलों की वर्तमान और अंतिम न्यायालयीय स्थिति अलग से सत्यापित किया जाना आवश्यक है।
22 अप्रैल 2022 के न्यायालयीय दस्तावेज में भी विभिन्न मुकदमों और आरोपित धाराओं का उल्लेख दिखाई देता है। इनमें धारा 395/412, 307 और 25 आर्म्स एक्ट सहित अन्य प्रावधान शामिल हैं।
इन मुकदमों में अंतिम स्थिति क्या रही, इसका पता संबंधित न्यायालय के अंतिम आदेश अथवा प्रमाणित निर्णय से ही चल सकेगा।
वर्ष 2026 के उपलब्ध दस्तावेज में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध पूर्व में गुंडा एक्ट की कार्रवाई और जिला बदर किए जाने का उल्लेख है।
इसी दस्तावेज में थाना सकरावा की हिस्ट्रीशीट संख्या HS-85A का भी उल्लेख किया गया है।
मामले में अब जमीन का विवाद भी महत्वपूर्ण हो गया है। मौजा मिर्जापुर, तहसील छिबरामऊ की गाटा संख्या 196 को लेकर सवाल उठाए गए हैं। उपलब्ध विभागीय सामग्री में इसे सिंचाई/नहर विभाग की भूमि बताया गया है।
यदि मूल राजस्व और सिंचाई विभाग के अभिलेख इस भूमि को सरकारी भूमि दर्शाते हैं तो जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस भूमि का कथित बैनामा किस आधार पर और किसके अधिकार से कराया गया?
इसकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए राजस्व रिकॉर्ड, खतौनी, खसरा, नक्शा, सिंचाई विभाग के अभिलेख और रजिस्ट्री कार्यालय में दर्ज मूल बैनामे का मिलान जरूरी होगा।
यदि गाटा संख्या 196 सरकारी भूमि है तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि बैनामा पंजीकरण के समय भूमि की प्रकृति का सत्यापन किस स्तर पर हुआ। राजस्व विभाग, सिंचाई विभाग और रजिस्ट्री कार्यालय के रिकॉर्ड में क्या दर्ज था और तीनों अभिलेख आपस में मेल खाते हैं या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।


