16 परिवार शरणालय भेजे
फर्रुखाबाद। कायमगंज तहसील के समैचीपुर चितार गांव में गंगा के तेज कटान ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। नदी की धार लगातार गांव की जमीन को काट रही है, जिससे कई पक्के मकान और झोपड़ियां गंगा में समा चुकी हैं। हालात को देखते हुए सिंचाई विभाग ने कटान रोकने के लिए बंबू क्रेट लगाने का काम शुरू कर दिया है। क्रेट में बालू से भरी बोरियां डालकर नदी की तेज धार के दबाव को कम करने की कोशिश की जाएगी। वहीं, प्रशासन ने खतरे की जद में आए 16 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बनाए गए बाढ़ शरणालय में भेज दिया है।
समैचीपुर चितार गांव गंगा की तेज धार के मुहाने पर बसा है। बाढ़ और कटान के कारण गांव में रहने वाले परिवारों की संख्या लगातार घट रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, नदी की धार ने हाल के दिनों में तेजी से जमीन काटी, जिसके चलते देखते ही देखते कई घर नदी में समा गए। कटान की रफ्तार को देखकर गांव में रह रहे परिवारों में दहशत का माहौल है और लोग अपने घर व सामान को सुरक्षित करने में जुटे हैं।
डीएम के निर्देश पर 16 परिवार सुरक्षित स्थान पर भेजे गए। बीते मंगलवार को जिलाधिकारी ने गांव पहुंचकर कटान प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया था। निरीक्षण के बाद उनके निर्देश पर प्रशासन ने 16 परिवारों को बाढ़ शरणालय में पहुंचाया। हालांकि अभी भी 45 परिवार गांव में रह रहे हैं। लेखपाल पंकज सिंह ने बताया कि ग्रामीणों को लगातार सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए समझाया जा रहा है। जो परिवार नदी की धार से कुछ दूरी पर हैं, उन्हें विशेष सतर्कता बरतने और खतरा बढ़ने पर तत्काल शरणालय पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं।
बांस और बोरियां पहुंचीं, बंबू क्रेट तैयार। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता विनोद कुमार और अवर अभियंता सुखवंत सिंह राठौर ने बताया कि कटान प्रभावित हिस्से में बांस और बोरियां पहुंचा दी गई हैं। बांस से क्रेट तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें बालू की बोरियां भरकर कटान वाले स्थानों पर डाली जाएंगी। अधिकारियों के अनुसार इससे नदी की तेज धार के सीधे दबाव को कम करने और कटान की गति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
कटान के कारण गांव में लगातार बढ़ रहे खतरे के बीच ग्रामीण अब प्रशासन की ओर से किए जा रहे बचाव कार्य पर नजर बनाए हुए हैं। लोगों का कहना है कि यदि नदी की धार इसी तरह जमीन काटती रही तो आने वाले दिनों में गांव के बचे हुए परिवारों के सामने भी सुरक्षित स्थान की तलाश का संकट खड़ा हो सकता है।


