फर्रुखाबाद। जनता की गाढ़ी कमाई से करीब 27.49 करोड़ रुपये की लागत से बना शुकुरुल्लाहपुर रेलवे ओवरब्रिज तीसरी बरसात भी नहीं झेल सका। पुल का ज्वाइंट धंसने के बाद प्रशासन ने आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया है। सबसे गंभीर बात यह है कि निर्माण में खामियां मिलने के कारण पुल का आज तक लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरण भी नहीं हो सका, फिर भी इस पर यातायात चालू कर दिया गया था।
बताया जा रहा है कि वर्षा के दौरान रेलवे ट्रैक के ऊपर बने हिस्से का ज्वाइंट धंस गया, जिससे सड़क पर बड़ा उभार बन गया और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया। इसके बाद रेलवे ने मरम्मत कार्य शुरू कराया, जो 12 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान फर्रुखाबाद–कायमगंज–दिल्ली मार्ग का यातायात नवाबगंज और मंझना होकर डायवर्ट किया गया है।
हैरानी की बात यह है कि दो वर्षों में पुल की तीन से चार बार मरम्मत हो चुकी है। इससे निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदार एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सेतु निगम के अधिकारियों से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि पुल कुछ ही वर्षों में जवाब दे दे, तो यह केवल तकनीकी खामी नहीं बल्कि जवाबदेही का भी बड़ा सवाल है। अब लोगों की मांग है कि पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।


