– वायरल वीडियो में दिखा अलग नजारा
– पुलिस की पटकथा में मामला सिर्फ गाली-गलौज और आपसी मारपीट तक सिमटा
– गरीब के बच्चे की मौत, और मुख्यमंत्री से न मिलने देने की घटना का पर्दा गिरा
शरद कटियार
फर्रुखाबाद। फतेहगढ़ पुलिस का जन्माष्टमी को जारी किया गया प्रेस नोट खूब चर्चा में है। वजह भी दिलचस्प है,जो घटनाक्रम वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा है, उसकी पटकथा प्रेस नोट में कुछ अलग ही नजर आ रही है। वीडियो में पुलिस की मौजूदगी, महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की और एक युवक के साथ मारपीट का दृश्य दिखाई देता है, जबकि पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक बयान में मामला दो पक्षों के बीच विवाद और गाली-गलौज का बताया गया है।
यानी कैमरा कुछ और बता रहा है और कागज कुछ और। कुल मिलाकर जन्माष्टमी के दिन बाल स्वरूप दिवंगत आत्मा को न्याय नहीं मिल सका बल्कि न्याय मांग रहे पीड़ित परिवार को ही जबरिया चुप कर दिया गया।
मामला थाना जहानगंज क्षेत्र के कोरीखेड़ा गांव का है, जहां 10 वर्षीय आशुतोष की हत्या को करीब नौ महीने बीत चुके हैं। परिवार लगातार न्याय और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है। गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जिले में आगमन के दौरान परिवार अपनी फरियाद पहुंचाना चाहता था।
इसी दौरान पुलिस गांव पहुंची और उसके बाद के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आ गए। वीडियो में जो दृश्य दिखाई दे रहे हैं, उनमें पुलिस की मौजूदगी और गरीब पीड़ित महिला से मारपीट साफ नजर आ रही है। वहीं शुक्रवार को पुलिस के प्रेस नोट में घटनाक्रम को ‘दो पक्षों में गाली-गलौज और मारपीट’ के रूप में समझाया गया है और स्थिति नियंत्रित करने के लिए आवश्यक न्यूनतम बल प्रयोग की बात कही गई है।
अब सवाल यह नहीं कि प्रेस नोट क्या कहता है। सवाल यह है कि वायरल वीडियो क्या कह रहा है?
अगर वीडियो और प्रेस नोट में इतना फर्क है तो जांच का पैमाना क्या होगा,कागज या कैमरा?
मृतक की बहन अंशिका गुप्ता ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पुलिस पर परिवार के साथ खुलेआम मारपीट अभद्रता और आपत्तिजनक भाषा के आरोप लगाए हैं। एक अन्य वायरल वीडियो को लेकर भी थाना प्रभारी पर मृतक की मां के संबंध में भी कहा गया है कि उसने ही अपने बेटे को मार डाला थाना अध्यक्ष इतना ही नहीं कहने से चुकी, यह तक कह डाला की मै पिल्लों को पैदा नहीं करती।
ऐसे में नौ महीने से बेटे के हत्यारों की गिरफ्तारी का इंतजार कर रही मां के लिए यह पूरा घटनाक्रम और कन्हैया का जन्मोत्सव और भी पीड़ादायक बन गया है, ज़ब न्याय की बात तो दूर, पुलिस की बर्बरता पर ही पर्दा डाल दिया गया ।
पुलिस की सफाई सामने आ गई, घटनाक्रम की अपनी व्याख्या भी आ गई। लेकिन वायरल वीडियो की जांच कौन करेगा, ये बात ही ख़त्म हो गईं, क्योंकि इलाके मे निरीह जनता का कोई कहने और सुनने वाला ही नहीं आज।
यही वह बिंदु है जहां पुलिस की कार्यशैली पर सवाल से ज्यादा प्रेस नोट की टाइमिंग और उसकी कहानी चर्चा का विषय बन गई है।
वीडियो में जो दिख रहा है, वह गलत है तो जांच हो कि गलत क्या है।और अगर वीडियो सही है, तो प्रेस नोट में कहानी इतनी छोटी क्यों कर दी गई? उत्तर प्रदेश सरकार जहां महिला सशक्तिकरण के अभियान चला रही है वहीं जनपद फर्रुखाबाद में महिलाओं पर आतंक ढाई जा रहे हैं वह भी उसे जनपद में जहां पर जिले की पुलिस कप्तान से लेकर थाना अध्यक्ष तक महिला है उसके बाद भी न्याय की बात दूबर है उलट मातृशक्ति पर ही जुल्म हो रहे, और मातृशक्ति ही छिपाने पर तुली।


