26 C
Lucknow
Sunday, September 6, 2026

आकाश को बार-बार जमीन पर पटकना, खुद में अपरिपक्वता बसपा को ‘परिपक्व’ राजनीति की जरुरत

Must read

शरद कटियार
बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद को एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी से दूर कर दिया गया। वजह बताई गई,आकाश अभी परिपक्व नहीं हुए हैं। सवाल सीधा है,अगर कोई युवा परिपक्व नहीं है तो उसे परिपक्व बनाने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या उसे बार-बार पद से हटाकर, सार्वजनिक रूप से उसकी राजनीतिक हैसियत घटाकर और फिर मौका छीनकर परिपक्व बनाया जाएगा?
आकाश आनंद की उम्र अभी 31 वर्ष है। राजनीति में यह उम्र सीखने, संघर्ष करने और अपनी पहचान बनाने की है, राजनीति से प्रमाणपत्र लेने की नहीं। दुनिया की लोकतांत्रिक राजनीति में युवा नेताओं को जिम्मेदारी देकर ही तैयार किया जाता है। उनसे गलतियां होती हैं, वे आलोचना झेलते हैं, सुधारते हैं और आगे बढ़ते हैं। लेकिन बसपा में आकाश के साथ जो हो रहा है, वह प्रशिक्षण कम और राजनीतिक अस्थिरता ज्यादा दिखाई देता है।
पिछले कुछ वर्षों में आकाश को जिम्मेदारी देने, हटाने और फिर वापस लाने का सिलसिला कई बार चला। वर्ष 2024 में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी से हटाया गया, फिर वापसी हुई। मार्च 2025 में उन्हें पार्टी के प्रमुख पदों से हटाया गया और बाद में फिर संगठन में भूमिका मिली। अब सितंबर 2026 में एक बार फिर उन्हें किनारे कर दिया गया। एक युवा नेता के राजनीतिक जीवन में बार-बार ऐसा सार्वजनिक उतार-चढ़ाव उसकी छवि को मजबूत नहीं, बल्कि कमजोर करता है।
और यही वह जगह है जहां सवाल केवल आकाश पर नहीं, मायावती की राजनीतिक परिपक्वता पर भी खड़ा होता है।
मायावती राजनीति की बेहद अनुभवी नेता हैं। उन्होंने अपने संघर्ष से बसपा को उत्तर प्रदेश की सत्ता तक पहुंचाया, दलित राजनीति को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में खड़ा किया और दशकों तक अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखी। लेकिन अनुभव का अर्थ यह नहीं कि हर राजनीतिक निर्णय सवालों से परे हो जाता है।
यदि आकाश अपरिपक्व हैं तो उन्हें जिम्मेदारी से हटाने के बजाय जिम्मेदारी के साथ प्रशिक्षित क्यों नहीं किया जाता?
उन्हें जनता के बीच भेजिए।
उन्हें संगठन संभालने दीजिए।
उन्हें कार्यकर्ताओं के बीच काम करने दीजिए।
गलती करें तो समझाइए।
गलत फैसला लें तो सुधारने का मौका दीजिए।
क्योंकि नेतृत्व आदेश से नहीं, अवसर से तैयार होता है।
किसी युवा को हर बार सार्वजनिक रूप से यह बताना कि वह ‘अभी बच्चा’ है, उसके आत्मविश्वास को चोट पहुंचा सकता है। इससे केवल आकाश की व्यक्तिगत राजनीतिक छवि प्रभावित नहीं होगी, बल्कि उनके समर्थक युवाओं में भी यह संदेश जाएगा कि पार्टी में ऊपर उठने के बाद भी आपका भविष्य एक व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर है।
बसपा की सबसे बड़ी चुनौती आज यही है कि वह व्यक्ति-केंद्रित राजनीति से संगठन-केंद्रित राजनीति की ओर कैसे लौटे। 2027 का विधानसभा चुनाव सामने है। ऐसे समय में पार्टी को बूथ स्तर पर मजबूत संगठन, नए कार्यकर्ता और युवा नेतृत्व की जरूरत है। लेकिन जिस युवा चेहरे को कभी भविष्य का नेता बताया जाता है, उसी को बार-बार सार्वजनिक रूप से पीछे धकेलने से संगठन में आखिर कौन-सा आत्मविश्वास पैदा होगा?
और एक बात और,आकाश आनंद की गलतियां होंगी तो उनकी आलोचना होनी चाहिए। कोई भी नेता आलोचना से ऊपर नहीं है। लेकिन आलोचना और राजनीतिक रूप से अपमानित करने में अंतर होता है। किसी युवा को सुधारने के नाम पर बार-बार उसकी राजनीतिक किरकिरी करना न तो संगठन के हित में है और न ही उस युवा के भविष्य के।
मायावती को यह तय करना होगा कि वह आकाश को वास्तव में तैयार करना चाहती हैं या केवल नियंत्रित रखना चाहती हैं। दोनों रास्तों का परिणाम अलग होगा।
अगर आकाश में कमी है तो उसे दूर करने का रास्ता काम छीनना नहीं, काम देना है।
अगर उनमें राजनीतिक अपरिपक्वता है तो उसका इलाज जिम्मेदारी से भागना नहीं, जिम्मेदारी देना है।
और अगर उनसे गलती हुई है तो राजनीति का सिद्धांत कहता है,सजा के साथ सुधार का रास्ता भी खुला रहना चाहिए।
आज सवाल आकाश से ज्यादा बसपा से है,जिस पार्टी को अपने भविष्य के लिए युवा नेतृत्व चाहिए, वह अपने ही युवा चेहरे को बार-बार जमीन पर क्यों पटक रही है?
और शायद इससे भी बड़ा सवाल,
क्या आकाश को परिपक्व होने का मौका नहीं मिल रहा, या फिर नेतृत्व को अपने अलावा किसी और के उभरने का भरोसा नहीं है?

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article