फर्रुखाबाद। कायमगंज थाना क्षेत्र में 19 मार्च को हुई मुठभेड़ में आरोपी कुलदीप के गोली लगने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र सचान ने पुलिस अधीक्षक आरती सिंह और तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक कायमगंज मदन मोहन चतुर्वेदी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई के लिए प्रकरण इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया है।
अदालत ने छह अगस्त को आदेश जारी कर दोनों अधिकारियों को सात दिन के भीतर मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। आदेश की प्रति सात अगस्त को अधिकारियों को प्राप्त करा दी गई थी, लेकिन निर्धारित समय में आदेश का पालन नहीं किया गया। इसी को अदालत ने हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों की अवहेलना माना है।
अदालत ने कुलदीप की 19 मार्च की चिकित्सीय रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट में उसके बाएं पैर में गोली के प्रवेश और निकास के घाव दर्ज किए गए थे तथा चोटों को ताजा बताया गया था। वहीं मुठभेड़ में पुलिसकर्मी हेड कांस्टेबल धर्मेंद्र तिवारी को गोली लगने की बात कही गई थी, लेकिन उनकी मेडिकल रिपोर्ट में कोहनी पर गोली के बजाय कठोर एवं कुंद वस्तु से चोट लगने का उल्लेख था। बाद की जांच में पुलिसकर्मियों के बयानों में चोट खेत में गिरने से लगने की बात सामने आई।
न्यायालय ने विवेचना की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। अदालत के अनुसार चोट की प्रकृति स्पष्ट हुए बिना 12 मई को आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया। बाद में न्यायालय के नोटिस के बाद 12 जून को पूरक मेडिकल रिपोर्ट तैयार कराई गई, जिसमें चोट को साधारण बताया गया।
तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक मदन मोहन चतुर्वेदी ने छह अगस्त के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने 21 अगस्त को अगली सुनवाई तक उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न करने का आदेश दिया था। हालांकि विशेष न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस आदेश से पुलिस पार्टी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई पर रोक नहीं लगी थी।
न्यायालय ने कहा कि दोनों अधिकारियों को हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए पर्याप्त अवसर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद निर्धारित समय में आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। इसी आधार पर एसपी आरती सिंह और तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक मदन मोहन चतुर्वेदी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई के लिए मामला हाईकोर्ट को संदर्भित कर दिया गया।


