महीने की पहली तारीख आमतौर पर नई दरों और कीमतों में बदलाव के लिए जानी जाती है, लेकिन इस बार इसकी शुरुआत कारोबारियों और वाहन चालकों के लिए कुछ महंगी साबित हुई है। व्यावसायिक इस्तेमाल वाले 19 किलो के एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने के साथ ही मुंबई में सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। हालांकि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
दिल्ली में 19 किलो वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर ₹9.50 महंगा होकर ₹2,747.50 पर पहुंच गया है। नई दरें आज से लागू हो गई हैं। व्यावसायिक गैस की कीमत बढ़ने का सीधा असर होटल, रेस्तरां, ढाबे, खानपान कारोबार और ऐसे अन्य प्रतिष्ठानों पर पड़ सकता है, जहां बड़ी मात्रा में एलपीजी का इस्तेमाल होता है।
देश के प्रमुख महानगरों में भी कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में बदलाव देखने को मिला है। मुंबई में 19 किलो के सिलेंडर की कीमत ₹2,701, जबकि चेन्नई में यह बढ़कर ₹2,916.50 हो गई है। ऐसे में छोटे कारोबारियों के लिए रसोई ईंधन की लागत में बढ़ोतरी उनके रोजमर्रा के संचालन खर्च को प्रभावित कर सकती है।
कमर्शियल एलपीजी के दाम बढ़ने के बावजूद घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में कोई वृद्धि नहीं की गई है। यानी घरों में खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले सिलेंडर पर फिलहाल अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा है।
यह राहत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि घरेलू बजट पहले ही खाद्य सामग्री, बिजली, परिवहन और अन्य रोजमर्रा के खर्चों के दबाव से प्रभावित होता है। घरेलू एलपीजी की कीमत स्थिर रहने से आम परिवारों को तत्काल राहत मिली है।
दूसरी ओर, मुंबई में वाहन चालकों के लिए तस्वीर अलग है। यहां सीएनजी के दाम में ₹2 प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है। नई दर लागू होने के बाद मुंबई में सीएनजी की कीमत ₹88 प्रति किलो हो गई है।
सीएनजी की कीमत बढ़ने का असर निजी वाहनों के साथ-साथ टैक्सी, ऑटो और अन्य व्यावसायिक वाहनों के संचालन पर भी पड़ सकता है। ईंधन की लागत बढ़ने पर परिवहन क्षेत्र में इसका असर किराये और माल ढुलाई की लागत पर पड़ने की आशंका रहती है।
घरों में पाइपलाइन के जरिए पहुंचने वाली पीएनजी की कीमत में भी ₹1 की वृद्धि की गई है। पीएनजी का इस्तेमाल करने वाले परिवारों के मासिक ईंधन खर्च में अब कुछ बढ़ोतरी हो सकती है।
एक ओर कमर्शियल एलपीजी महंगी हुई है, दूसरी ओर सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। ऐसे में इसका प्रभाव केवल किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा। कारोबारियों के संचालन खर्च से लेकर परिवहन लागत और घरेलू ईंधन बजट तक पर इसका असर दिखाई दे सकता है।
कमर्शियल गैस की कीमत बढ़ने का सबसे बड़ा असर उन छोटे कारोबारियों पर पड़ता है, जिनका दैनिक कामकाज एलपीजी पर निर्भर है। होटल, ढाबे, चाय-नाश्ते की दुकानें, मिठाई की दुकानें और अन्य खाद्य कारोबारों में गैस एक आवश्यक खर्च है।
ऐसे में गैस की कीमत में मामूली वृद्धि भी लंबे समय में कारोबार की कुल लागत बढ़ा सकती है। कारोबारी अक्सर इस अतिरिक्त खर्च को कीमतों में समायोजित करते हैं, जिसका अप्रत्यक्ष असर उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल घरेलू एलपीजी के दाम स्थिर रहने से आम परिवारों को राहत जरूर मिली है, लेकिन कमर्शियल एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी की बढ़ी कीमतें यह संकेत देती हैं कि ईंधन लागत का दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में इसका वास्तविक असर बाजार, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर कितना पड़ता है, यह देखने वाली बात होगी।


