– मीडिया रिपोर्ट के आधार पर फैसला नहीं होगा, आरोपों की तय प्रक्रिया के तहत होगी जांच
– जस्टिस मेहता की सामग्री और जस्टिस शर्मा के जवाब पर सुप्रीम कोर्ट की नजर
नई दिल्ली। न्यायपालिका में न्यायाधीशों पर लगाए जाने वाले आरोपों को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी न्यायाधीश पर आरोप लग जाना अपने आप में किसी निष्कर्ष तक पहुंचने का आधार नहीं है। आरोपों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत देखा और परखा जाएगा।
सीजेआई ने कहा कि न्यायाधीशों पर लगे आरोपों के मामले में अदालत केवल मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर कोई निर्णय नहीं लेगी। आरोपों की सत्यता और उससे जुड़े तथ्यों को तय प्रक्रिया के अनुसार जांचा जाएगा और उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद ही आगे की कार्रवाई को लेकर कोई फैसला किया जाएगा।
मामले में जस्टिस मेहता की ओर से उठाई गई चिंताओं और उपलब्ध कराई गई सामग्री पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है। अदालत इस सामग्री को देख रही है और मामले से जुड़े तथ्यों को समझने की प्रक्रिया जारी है।
वहीं, जस्टिस शर्मा की ओर से दिए गए जवाब को भी अदालत के समक्ष महत्वपूर्ण सामग्री के तौर पर देखा जा रहा है। यानी सुप्रीम कोर्ट केवल एक पक्ष की बात के आधार पर आगे नहीं बढ़ेगा, बल्कि दोनों पक्षों की ओर से सामने रखी गई सामग्री और जवाब का परीक्षण करेगा।
सीजेआई सूर्यकांत ने संकेत दिया कि मामले में उपलब्ध दोनों पक्षों की सामग्री पर समग्र रूप से विचार किया जाएगा। अदालत का जोर आरोपों के आधार पर तत्काल निष्कर्ष निकालने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने पर है।
न्यायपालिका में किसी जज पर आरोप लगना गंभीर विषय माना जाता है, लेकिन आरोप और आरोप सिद्ध होने के बीच अंतर को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी वजह से अदालत ने प्रक्रिया के अनुसार तथ्यों की जांच पर जोर दिया है।
सीजेआई का यह बयान ऐसे मामलों में मीडिया रिपोर्टों की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने साफ किया कि केवल मीडिया में आई खबरों या रिपोर्टों के आधार पर न्यायाधीश के संबंध में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा।
अदालत संबंधित पक्षों की सामग्री, जवाब और अन्य उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण करेगी। इसके बाद ही यह तय किया जाएगा कि मामले में आगे क्या कार्रवाई की जानी है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़ी सामग्री पर नजर रखी है। जस्टिस मेहता की ओर से सामने रखी गई सामग्री और जस्टिस शर्मा के जवाब पर विचार के बाद ही आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जाएगा।


