बोलीं- जज पर दबाव नहीं बनाया
गोंडा। सिविल जज द्वारा लगाए गए दबाव और धमकी के आरोपों के बाद आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने मंगलवार को अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल सरकारी जमीन से जुड़े करीब 30 साल पुराने लंबित मुकदमे में सरकारी पक्ष की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करना था। उन्होंने जज पर किसी तरह का दबाव बनाने से इनकार किया।
दुर्गा शक्ति नागपाल ने सूचना विभाग के माध्यम से जारी बयान में कहा कि बातचीत के दौरान मुकदमे के गुण-दोष, फैसले, मुकदमा संख्या या किसी विशेष मामले पर चर्चा नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने केवल यह जानने के लिए फोन किया था कि पीठासीन अधिकारी छुट्टी से कब लौटेंगी, ताकि लंबित मामले की सुनवाई आगे बढ़ सके।
मामला गोंडा की सीनियर डिवीजन सिविल जज शबीना खान से जुड़ा है। जज ने चार अगस्त को जिला जज को पत्र भेजकर आरोप लगाया था कि मंडलायुक्त ने अपने पद का प्रभाव इस्तेमाल करते हुए उन पर अनुचित दबाव बनाया और हाईकोर्ट में शिकायत करने की धमकी दी। जज ने मुकदमे को किसी दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
यह विवाद ‘ज्योति विद्या मंदिर बनाम नगरपालिका’ मामले को लेकर है, जो करीब 30 वर्षों से अदालत में लंबित है। मंडलायुक्त के अनुसार मामला सरकारी नजूल जमीन से जुड़ा है। उनका कहना है कि जमीन का पट्टा 1985 में ही निरस्त कर उसे सरकारी अभिलेखों में दर्ज किया जा चुका था, लेकिन बाद में एक निजी स्कूल द्वारा इस जमीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी सरकारी जमीन की सुरक्षा और सही पैरवी को लेकर उन्होंने पहल की थी।
वहीं, सिविल जज ने अपने पत्र में अलग घटनाक्रम बताया था। उनके अनुसार 15 जुलाई को पहले एक अनजान नंबर से फोन आया, जिसे उनके सात वर्षीय बेटे ने उठाया। बाद में दोबारा फोन आने पर कॉल करने वाली महिला ने खुद को मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल बताया और छुट्टी से लौटने के बारे में पूछा। इसके बाद मुकदमे को लेकर बातचीत हुई।
जज के आरोप के मुताबिक, बाद की बातचीत में उन्हें हाईकोर्ट में शिकायत करने की बात कही गई और उनके व्यवहार तथा संस्कारों पर भी सवाल उठाए गए। जज ने इसे अपने पद पर अनुचित दबाव बताया था। इसके बाद उन्होंने मामले को दूसरी अदालत में भेजने की मांग की थी।
मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने भी सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इसे न्यायिक कार्य में हस्तक्षेप और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए गंभीर मामला माना। अदालत ने आपराधिक अवमानना की कार्रवाई पर विचार के लिए मामला मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने के निर्देश दिए हैं।
दुर्गा शक्ति नागपाल ने कहा कि वह न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता का पूरा सम्मान करती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी न्यायिक अधिकारी को प्रभावित करना नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति से जुड़े पुराने मामले में सरकार का पक्ष मजबूती से रखना था। अब मामले में हाईकोर्ट की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर है।


