ठेकों में कथित सिंडिकेट और वसूली के आरोप
कानपुर। मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद कानपुर नगर निगम में पिछले चार वर्षों के करीब 650 करोड़ रुपये के 275 टेंडरों की जांच शुरू हो गई है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के निर्देश पर नगर निगम के सभी छह जोनों के अधिकारी पुरानी टेंडर फाइलें खंगाल रहे हैं। जांच में ठेकों के आवंटन, फर्मों के पंजीकरण, निविदाओं की प्रक्रिया और कामों के भौतिक सत्यापन को शामिल किया गया है।
नगर आयुक्त ने अधिकारियों के साथ बैठक कर टेंडरों में संभावित गड़बड़ियों की जांच शुरू कराई है। उनका कहना है कि जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी और गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जांच में यह देखा जा रहा है कि किन फर्मों को लगातार बड़े ठेके मिले, किन फर्मों का पंजीकरण नियमों को दरकिनार कर किया गया और चार वर्षों में किस कंपनी को कितने करोड़ रुपये के काम दिए गए। 15वें वित्त आयोग से कराए गए कार्यों का मौके पर सत्यापन भी शुरू किया गया है।
टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जांच में यह देखा जा रहा है कि अधिक छूट देने वाले ठेकेदारों को काम क्यों नहीं मिला, जबकि बेहद कम छूट देने वाली फर्मों को ठेके कैसे हासिल हुए। साथ ही ऑनलाइन निविदाओं के अंतिम समय से कुछ देर पहले वेबसाइट पर प्रदर्शित होने की शिकायतों की भी जांच की जा रही है।
नगर निगम के कई ठेकेदारों ने आरोप लगाया है कि एक सीमित समूह को बड़े ठेके दिलाने के लिए पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया जाता रहा। ठेकेदारों का दावा है कि कुछ ऐसी फर्मों का भी पंजीकरण हुआ, जिनके पास संबंधित काम के लिए जरूरी संसाधन तक नहीं हैं। कुछ ठेकेदारों ने कमीशन और सिंडिकेट के जरिए ठेके मैनेज किए जाने के आरोप भी लगाए हैं।
मामला राजनीतिक आरोपों तक भी पहुंच गया है। कुछ भाजपा पार्षदों ने नगर निगम में कथित ‘बंटी टैक्स’ के नाम से वसूली और ठेकों के प्रबंधन के आरोप लगाए हैं। पार्षदों ने दावा किया कि कथित रूप से एक प्रभावशाली समूह से जुड़े ठेकेदारों को ही बड़े काम मिलते हैं। हालांकि, ये आरोप जांच का विषय हैं और संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आना बाकी है।
नगर आयुक्त की जांच के बाद अब यह साफ होने की उम्मीद है कि पिछले चार वर्षों में नगर निगम के करोड़ों रुपये के ठेकों में नियमों का पालन हुआ या नहीं। अधिकारियों के मुताबिक जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी और रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।


