– डीएम डॉ. अंकुर लाठर की संवेदनशील पहल से सक्रिय हुई पूरी प्रशासनिक मशीनरी
– स्वास्थ्य विभाग की तत्परता ने बचाई मासूम की जान
फर्रुखाबाद। नवाबगंज ब्लॉक के रसिदाबाद वल्लभ गांव में एक मासूम बच्ची के 45 फीट गहरे सूखे कुएं में गिरने की घटना ने पूरे गांव की सांसें रोक दीं। कुएं के अंधेरे में जिंदगी के लिए जूझ रही सोम्या को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू कराया। करीब तीन घंटे की अथक कोशिश के बाद बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू एवं चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। एक बच्ची की जिंदगी से जुड़े इस संकट में डीएम की संवेदनशीलता और मातृत्व जैसी मानवीय संवेदना भी दिखाई दी। उनका स्पष्ट जोर रहा कि बच्ची को सुरक्षित निकालने के साथ ही उसे तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
तीन एंबुलेंस और चिकित्सा टीम मौके पर पहुंची
सूचना मिलते ही एमओआईसी कायमगंज डॉ. विनीत तथा एमओआईसी नवाबगंज डॉ. लोकेश शर्मा घटनास्थल के लिए रवाना हुए। तीन 108 एंबुलेंस भी मौके पर भेजी गईं। ऑक्सीजन सिलेंडर समेत चिकित्सा संसाधनों को तैयार रखा गया।
रेस्क्यू टीम ने संकरे और गहरे कुएं में उतरकर बच्ची तक पहुंचने का प्रयास शुरू किया। करीब तीन घंटे तक चले अभियान में ग्रामीणों और रेस्क्यू टीम ने पूरी तत्परता से सहयोग किया।
सुरक्षित बाहर आते ही चिकित्सा जांच
कड़ी मशक्कत के बाद सोम्या को कुएं से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बच्ची के बाहर आते ही मौके पर मौजूद चिकित्सा टीम ने उसका तत्काल स्वास्थ्य परीक्षण किया।
डिप्टी सीएमओ डॉ. आरसी माथुर के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम ने बच्ची की स्थिति का परीक्षण किया। चिकित्सक एवं स्टाफ नर्स की निगरानी में उसे 108 एंबुलेंस से तत्काल जिला चिकित्सालय लोहिया भेजा गया।
लोहिया अस्पताल में शुरू हुआ उपचार
जिला चिकित्सालय लोहिया में सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा के नेतृत्व में डॉ. विवेक सक्सेना समेत चिकित्सकों की टीम ने बच्ची की जांच शुरू की। आवश्यक रक्त जांच, सीटी स्कैन सहित अन्य चिकित्सकीय परीक्षण कराए गए। चिकित्सकों ने बच्ची को निगरानी में रखते हुए आवश्यक उपचार एवं मेडिकल मैनेजमेंट सुनिश्चित किया।
कुएं से बाहर आने के बाद सोम्या की स्थिति पर चिकित्सकों ने लगातार नजर रखी। बच्ची के सुरक्षित होने की जानकारी मिलने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय ने करीब दो माह पूर्व जनपद के स्वास्थ्य विभाग की कमान संभाली है। इस दौरान आपात परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया, चिकित्सा टीमों की उपलब्धता और अन्य विभागों के साथ बेहतर समन्वय पर जोर दिया जा रहा है।
सोम्या के रेस्क्यू में भी स्वास्थ्य विभाग की यही कार्यशैली दिखाई दी। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य अधिकारी मौके पर पहुंचे, एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई, बच्ची के बाहर आते ही मेडिकल असेसमेंट किया गया और बिना देरी अस्पताल में जांच एवं उपचार शुरू कराया गया।
जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की कि अनुपयोगी बोरवेल, खुले कुएं और गड्ढों को किसी भी स्थिति में खुला न छोड़ें। उन्हें सुरक्षित रूप से ढककर रखें और बच्चों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखें।
उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। एक खुले कुएं या बोरवेल को सुरक्षित करना किसी संभावित हादसे को रोकने के साथ एक जिंदगी बचाने की दिशा में बड़ा कदम है।
सोम्या की कहानी सिर्फ एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं, बल्कि प्रशासनिक तत्परता, स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता और विभागीय समन्वय की मिसाल बन गई। 45 फीट की गहराई में फंसी मासूम को करीब तीन घंटे बाद सुरक्षित बाहर निकालना उस सामूहिक प्रयास की सफलता है, जिसमें हर स्तर पर एक ही लक्ष्य था,एक बेटी की जिंदगी बचाना।
डीएम डॉ. अंकुर लाठर की संवेदनशील पहल, स्वास्थ्य विभाग की तत्परता और रेस्क्यू टीम के साहस ने 45 फीट गहरे अंधेरे से सोम्या को जिंदगी की रोशनी तक पहुंचा दिया।


