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Saturday, July 4, 2026

प्रबंध समिति की बड़ी कार्रवाई: कन्या विद्यापीठ इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या निलंबित, विभागीय जांच के आदेश

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त्रिस्तरीय जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई, प्रधानाचार्या ने बताया अवैधानिक और आरोपों को किया खारिज
फर्रुखाबाद। कायमगंज स्थित कन्या विद्यापीठ इंटर कॉलेज में प्रशासनिक विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। विद्यालय की प्रबंध समिति ने त्रिस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रधानाचार्या विश्व मोहिनी पांडेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। वहीं प्रधानाचार्या ने इस कार्रवाई को पूरी तरह अवैधानिक, मनमानी और फर्जी रिपोर्ट पर आधारित बताते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। मामले को लेकर शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रबंधन के बीच हलचल तेज हो गई है।
प्रबंध समिति की प्रबंधक कल्पना सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार, भारतीय किसान यूनियन अखंड प्रदेश की शिकायत पर जिलाधिकारी के निर्देश से गठित त्रिस्तरीय जांच समिति ने विद्यालय में विभिन्न बिंदुओं की जांच की थी। जांच रिपोर्ट जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) के माध्यम से प्रबंध समिति को प्राप्त हुई, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई।
प्रबंध समिति का कहना है कि जांच रिपोर्ट में मध्याह्न भोजन योजना के संचालन, विद्यालय के अभिलेखों के रखरखाव, छात्राओं से शुल्क वसूली संबंधी शिकायतों, परीक्षा अभिलेखों के रखरखाव तथा अन्य प्रशासनिक अनियमितताओं के मामलों में प्रधानाचार्या को प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माना गया है। इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर माध्यमिक शिक्षा अधिनियम के प्रावधानों के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई केवल प्रथम दृष्टया जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही होगी। निलंबन अवधि के दौरान प्रधानाचार्या को जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय, फर्रुखाबाद से संबद्ध किया गया है तथा उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। साथ ही आरोपों की विस्तृत जांच के लिए अलग से जांच समिति गठित की गई है। प्रधानाचार्या को जांच में पूर्ण सहयोग करने तथा अपना कार्यभार प्रवक्ता मधु मौर्य को सौंपने के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्रधानाचार्या का पक्ष: “बिना नोटिस निलंबन अवैधानिक, आरोप पूरी तरह निराधार”
प्रधानाचार्या विश्व मोहिनी पांडेय ने निलंबन की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई आधिकारिक पत्र या नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। उन्हें निलंबन की जानकारी अन्य माध्यमों से मिली, जो विधिसम्मत प्रक्रिया के विपरीत है। उनका कहना है कि बिना कारण बताओ नोटिस दिए की गई कार्रवाई पूरी तरह अवैधानिक और मनमानी है।
उन्होंने दावा किया कि जिन आरोपों के आधार पर उन्हें निलंबित किया गया है, वे सभी निराधार हैं। उनके अनुसार त्रिस्तरीय समिति द्वारा कोई नई जांच या पूछताछ नहीं की गई, बल्कि एक कथित फर्जी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि इन सभी बिंदुओं की पहले भी जांच हो चुकी है और संबंधित जांच रिपोर्ट उनके पास उपलब्ध है।
प्रधानाचार्या ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले से जिला विद्यालय निरीक्षक को मौखिक रूप से अवगत करा दिया है। उनके अनुसार डीआईओएस ने कहा है कि जब तक विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आदेश या टिप्पणी नहीं आती, तब तक इस निलंबन का कोई औचित्य नहीं है। डीआईओएस के निर्देशों के अनुरूप वह नियमित रूप से विद्यालय जा रही हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानाचार्य कक्ष की अलमारी पर अतिरिक्त ताला लगा दिया गया है तथा कर्मचारियों की उपस्थिति पंजिका गायब है। क्लर्क ने लिखित रूप से उन्हें बताया है कि उक्त रजिस्टर प्रबंधक अपने साथ ले गए हैं। इस संबंध में भी जिला विद्यालय निरीक्षक को सूचना दे दी गई है।
प्रधानाचार्या ने यह भी कहा कि इस विद्यालय के इतिहास में पहली बार आयोग के माध्यम से किसी स्थायी प्रधानाचार्य की नियुक्ति हुई है और वह वर्तमान में उसी पद पर कार्यरत हैं।

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