प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने का सपना संजोए लाखों अभ्यर्थियों के लिए बुधवार से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का शुभारंभ हो गया। पहली बार उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग के माध्यम से आयोजित हो रही यह परीक्षा 2 जुलाई से 4 जुलाई तक तीन दिनों में प्रदेश के 60 जिलों में संपन्न कराई जाएगी।
आयोग ने परीक्षा के लिए प्रदेशभर में 955 परीक्षा केंद्र बनाए हैं, जहां सुरक्षा और पारदर्शिता के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। परीक्षा में कुल 19 लाख 94 हजार 661 अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन, फेस रिकॉग्निशन, स्टैटिक मजिस्ट्रेट और उड़नदस्तों की तैनाती की गई है, ताकि परीक्षा निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
आयोग के अनुसार, सभी परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, अभ्यर्थियों की पहचान और परीक्षा संचालन के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
परीक्षा केंद्रों की संख्या के लिहाज से वाराणसी सबसे आगे है, जहां 68 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इसके अलावा प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, आगरा, मेरठ, बरेली और अन्य प्रमुख जिलों में भी बड़ी संख्या में केंद्र स्थापित किए गए हैं।
शिक्षा चयन आयोग का कहना है कि इस परीक्षा के माध्यम से योग्य अभ्यर्थियों का चयन कर प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। परीक्षा को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
परीक्षा के पहले दिन सुबह से ही विभिन्न केंद्रों पर अभ्यर्थियों की भीड़ देखने को मिली। निर्धारित समय से पहले ही अभ्यर्थियों की जांच के बाद उन्हें परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिया गया। आयोग ने अभ्यर्थियों से प्रवेश पत्र, वैध पहचान पत्र और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।


