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Tuesday, June 30, 2026

आरसीयूईएस के प्रशिक्षण में सुरक्षित सीवर सफाई पर जोर

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– सुएज इंडिया के सुरक्षा प्रोटोकॉल बने आकर्षण का केंद्र

लखनऊ। स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा और सुरक्षित सीवर सफाई को बढ़ावा देने के उद्देश्य से द्वारा 29 एवं 30 जून 2026 को ऑक्यूपेशनल हेल्थ एंड सेफ्टी इन सैनिटेशन विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शहरी स्थानीय निकायों से जुड़े अधिकारियों, इंजीनियरों एवं स्वच्छता कर्मियों को सुरक्षित कार्य प्रणाली, आधुनिक तकनीकों और कार्यस्थल सुरक्षा के प्रति जागरूक करना था।

प्रशिक्षण के दूसरे दिन 30 जून को “प्रैक्टिकल डिमॉन्स्ट्रेशन ऑन सेफ डीस्लजिंग ” विषय पर विशेष तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में के हेल्थ एंड सेफ्टी ऑफिसर ने अधिकारियों, इंजीनियरों एवं स्वच्छता कर्मियों को सुरक्षित सीवर संचालन के अंतरराष्ट्रीय मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल की विस्तृत जानकारी दी।

पंकज सिंह ने बताया कि सुएज इंडिया में 100 प्रतिशत पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट अनुपालन, मल्टी गैस डिटेक्टर से गैस परीक्षण, वर्क परमिट सिस्टम, नियमित सुरक्षा प्रशिक्षण, एसओपी आधारित मैनहोल एंट्री, नो मैनुअल स्कैवेंजिंग नीति, समर्पित सुरक्षा अधिकारी की तैनाती तथा जोखिम मूल्यांकन जैसी प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी सुरक्षा मानकों के अनुपालन के बिना किसी भी कर्मचारी को सीवर या मैनहोल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती।
तकनीकी सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने सुरक्षित सीवर संचालन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों, उपकरणों और सुरक्षा प्रक्रियाओं को व्यावहारिक रूप से समझा। अधिकारियों और स्वच्छता कर्मियों ने सुएज इंडिया के सुरक्षा मॉडल में विशेष रुचि दिखाई तथा विशेषज्ञों से विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इस बात पर बल दिया कि आधुनिक उपकरणों का उपयोग, नियमित प्रशिक्षण और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन ही स्वच्छता कर्मियों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है। उन्होंने कहा कि सीवर सफाई कार्य में मानवीय जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम को सुरक्षित स्वच्छता प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से शहरी क्षेत्रों में कार्यरत स्वच्छता कर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, दुर्घटनाओं में कमी आएगी और सीवर सफाई व्यवस्था अधिक सुरक्षित, वैज्ञानिक एवं प्रभावी बन सकेगी।

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