फर्रुखाबाद। गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर के साथ सदर तहसील क्षेत्र के दिलीप की मड़ैया गांव में कटान ने भयावह रूप ले लिया है। बीते दो दिनों में गंगा की तेज धारा और कटान के चलते आठ मकान नदी में समा चुके हैं, जबकि कई अन्य मकान कटान की जद में हैं। गुरुवार को तीन मकान गंगा में बह गए, जबकि बुधवार को भी पांच मकानों का अस्तित्व खत्म हो गया था। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों में पूरे गांव के गंगा में समा जाने का डर बना हुआ है।
गांव के चारों ओर बाढ़ का पानी भरा हुआ है और अब कुछ ही मकान सुरक्षित बचे हैं। गुरुवार को कटान की चपेट में आने से सुखपाल का मकान पूरी तरह गंगा में समा गया। इसके अलावा ओमकार और रामवीर के मकान भी तेज धारा की चपेट में आ गए। तीन अन्य मकानों की दीवारें गिर चुकी हैं और उनके लिंटर हवा में लटक रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ये मकान भी कभी भी धराशायी हो सकते हैं।
कटान की रफ्तार से दहशत, अधिकांश परिवार घर छोड़ चुके
ग्रामीण मचले सिंह के मुताबिक इस बार गंगा का कटान बेहद तेज है। गांव के ज्यादातर परिवार अपने घर खाली कर सुरक्षित स्थानों की ओर जा चुके हैं। सबसे बड़ी चिंता बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं की सुरक्षा को लेकर है। कई परिवार खुले आसमान के नीचे या अन्य सुरक्षित स्थानों पर रहने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गंगा की धारा ने गांव के आसपास करीब 30 मीटर दूरी पर उल्टी धार से गहरा गड्ढा बना दिया है। इसके बावजूद नदी लगातार गांव की ओर कटान कर रही है। ग्रामीणों के अनुसार गंगा करीब 10 से 12 मीटर अंदर तक जमीन काट चुकी है, जिससे बचे हुए मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
मकान खुद तोड़कर सामान बचा रहे ग्रामीण
कटान की भयावह स्थिति को देखते हुए कई ग्रामीण अपने मकानों को खुद तोड़ने में जुट गए हैं, ताकि ईंट, लकड़ी और अन्य घरेलू सामान को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सके। लेकिन गांव तक पहुंचने वाले रास्ते भी बाढ़ और कटान से प्रभावित हो चुके हैं। रास्ता खराब होने के कारण सामान बाहर निकालना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
36 गांव बाढ़ की चपेट में, प्रशासन ने लिया जायजा
फर्रुखाबाद जिले में गंगा समेत अन्य नदियों के बढ़े जलस्तर के कारण करीब 36 गांव बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। गुरुवार को लेखपाल रामवरन ने दिलीप की मड़ैया पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। वहीं उप जिलाधिकारी सदर संजय कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार को कटान के कारण लटक रहा सुखपाल का मकान भी गुरुवार को गिर गया।
एसडीएम के अनुसार क्षतिग्रस्त मकानों का नियमानुसार आकलन कर प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
ग्रामीणों की मांग—कटान रोकने को तत्काल हो बचाव कार्य
ग्रामीणों का कहना है कि हर साल गंगा का जलस्तर बढ़ने पर गांव को कटान का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बार स्थिति बेहद गंभीर है। नदी लगातार आबादी की ओर बढ़ रही है और यदि तत्काल बचाव कार्य नहीं कराया गया तो बचे हुए मकान भी गंगा की धारा में समा सकते हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से कटान रोकने के लिए तत्काल प्रभावी बचाव कार्य कराने, प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और बेघर हुए लोगों को उचित सहायता एवं मुआवजा देने की मांग की है। गांव में लगातार बढ़ते खतरे के बीच हर गुजरता घंटा ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रहा है।


