प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शराब के लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि बिना स्थान (लोकेशन) तय किए शराब का लाइसेंस जारी करना गंभीर विषय है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि लाइसेंस जारी करने की पूरी प्रक्रिया नियमों और पारदर्शिता के अनुरूप होनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि किसी भी शराब की दुकान का लाइसेंस जारी करने से पहले उसके स्थान का स्पष्ट निर्धारण आवश्यक है। बिना निर्धारित स्थान के लाइसेंस जारी करना न केवल नियमों के विपरीत है, बल्कि इससे विवाद और प्रशासनिक कठिनाइयां भी उत्पन्न हो सकती हैं।
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से इस प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने और नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि आबकारी विभाग को लाइसेंस जारी करने में निर्धारित मानकों और वैधानिक प्रावधानों का सख्ती से पालन करना होगा।
यह टिप्पणी भविष्य में शराब लाइसेंस आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


