नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी हवाई हमलों में आईआरजीसी (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के तीन सदस्यों की मौत के बाद ईरान ने जॉर्डन के अजराक स्थित मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस पर 10 मिसाइलें दागने का दावा किया है। हालांकि, जॉर्डन ने ईरान के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने सभी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया और एयर बेस पूरी तरह सुरक्षित है।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, हमला अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को निशाना बनाकर किया गया और एयर बेस को भारी नुकसान पहुंचा। वहीं जॉर्डन सरकार का कहना है कि हमले के दौरान पूरे क्षेत्र में अलर्ट जारी किया गया, लेकिन किसी भी सैन्य ठिकाने को नुकसान नहीं हुआ।
इससे पहले अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए थे, जिनमें आईआरजीसी के तीन सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि ईरानी मीडिया ने की थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी, जो अब क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा रही है।
तनाव का असर पूरे खाड़ी क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन सहित कई देशों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। अमेरिका ने भी अपने सैन्य ठिकानों पर सतर्कता बढ़ा दी है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका पूर्ण युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी हमले का “कड़ा और निर्णायक जवाब” दिया जाएगा।
पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते घटनाक्रम ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। यदि हालात जल्द नहीं संभले, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विश्व अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।


