अयोध्या। अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में राजनीतिक और कानूनी हलचल लगातार तेज होती जा रही है। पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि इस मामले में आने वाले समय में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी जांच के दायरे में आ सकते हैं और उनके खिलाफ भी कार्रवाई संभव है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस पूरे प्रकरण को लेकर उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आधी रात करीब डेढ़ बजे बातचीत हुई, जिसमें जांच और आगे की स्थिति पर चर्चा हुई।
विनय कटियार ने कहा कि अब तक हुई जांच से चढ़ावे में गड़बड़ी और आर्थिक अनियमितताओं के संकेत स्पष्ट हो चुके हैं। उन्होंने ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा और विनोद राव की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ी तो इन लोगों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई हो सकती है। उनके बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
इधर, चार वर्ष पुराने अयोध्या जमीन खरीद प्रकरण को लेकर भी एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि मंदिर निर्माण शुरू होने से पहले हुए जमीन खरीद घोटाले की गहराई से जांच कर समय रहते कार्रवाई की जाती, तो आज चढ़ावा चोरी जैसे गंभीर मामले सामने नहीं आते। वर्ष 2021 में कई अधिकारियों, उनके रिश्तेदारों और रसूखदार लोगों के नाम पर जमीन खरीद के दस्तावेज सामने आए थे, लेकिन जांच अपेक्षित स्तर तक आगे नहीं बढ़ सकी।
वर्तमान में विशेष जांच दल (SIT) चढ़ावा चोरी प्रकरण की कई पहलुओं से जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट से जुड़े कई लोगों से पूछताछ हो चुकी है और आने वाले दिनों में कुछ अन्य लोगों से भी पूछताछ तथा आगे की कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। मामले ने प्रदेश की राजनीति के साथ-साथ राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर भी कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं।


