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Wednesday, May 20, 2026

बिजली कटौती से ग्रामीणों में भारी रोष, दिन-रात घंटों बाधित रहती है आपूर्ति

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फर्रुखाबाद। भीषण गर्मी के बीच जिले के ग्रामीण इलाकों में लगातार हो रही बिजली कटौती ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। एक तरफ तापमान चरम पर है, वहीं दूसरी ओर बिजली विभाग की लचर व्यवस्था ने ग्रामीणों की परेशानी को कई गुना बढ़ा दिया है। दिन हो या रात, कई-कई घंटों तक बिजली आपूर्ति ठप रहने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
ताजा मामला कायमगंज क्षेत्र के बरझाला उपकेंद्र से जुड़ा है, जहां से जुड़े एक दर्जन के करीब गांव—पपड़ी, बरझाला, अताईपुर, भुड़िया, अहमदगंज, शंकर नगला, अतु नगला और कुआं खेड़ा—लगातार बिजली संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां मनमाने ढंग से बिजली काटी जाती है और इस पर किसी अधिकारी का कोई नियंत्रण नहीं है।
ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय भी कई-कई घंटे बिजली गायब रहती है, जिससे भीषण गर्मी में लोगों को जागकर रात बितानी पड़ रही है। ऊपर से मच्छरों का प्रकोप स्थिति को और बदतर बना देता है। छोटे-छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति बेहद कष्टदायक हो गई है। लोगों का कहना है कि दिन में किसी तरह कटौती सहन कर ली जाती है, लेकिन रात में बार-बार बिजली जाना अब असहनीय हो चुका है।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि जरा सी तेज हवा या हल्की बारिश होते ही पूरी रात के लिए बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है। शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। ग्रामीणों ने कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों और हेल्पलाइन 1912 पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि जब भी इस संबंध में अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की जाती है तो या तो फोन नहीं उठाया जाता, और यदि उठाया भी जाता है तो संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता। यहां तक कि कई बार अधिकारियों को यह तक जानकारी नहीं होती कि बिजली कटौती किस आदेश पर हो रही है और आपूर्ति कब बहाल होगी।
जब इस मामले में बरझाला उपकेंद्र के अवर अभियंता कृष्ण कुमार मौर्य से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कटौती पनकी से की जा रही है और स्थानीय स्तर से कोई कटौती नहीं की जा रही है।
लगातार बढ़ रही इस समस्या से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने मांग की है कि बिजली व्यवस्था में सुधार कर नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि भीषण गर्मी में राहत मिल सके। अब देखना यह होगा कि संबंधित उच्च अधिकारी इस गंभीर समस्या को लेकर क्या कदम उठाते हैं या ग्रामीणों को यूं ही परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

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