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Friday, June 26, 2026

जांच किसी एक स्तर पर नहीं रुकनी चाहिए’: विहिप

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नई दिल्ली। राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर चल रही जांच के बीच विश्व हिंदू परिषद (विहिप ) के वरिष्ठ नेता आलोक कुमार का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मामले की जांच केवल अब तक नामजद आठ आरोपियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जिन-जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उन सभी की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में किसी भी व्यक्ति को केवल पद या प्रभाव के आधार पर जांच के दायरे से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।

आलोक कुमार ने कहा, “जांच सिर्फ इन आठ लोगों तक सीमित नहीं है। जिन और लोगों पर आरोप है, उनकी भी जांच होनी चाहिए। चंपत राय और अनिल मिश्रा भी जांच के दायरे से बाहर नहीं हैं। छोटी हो या बड़ी मछली, किसी को भी छोड़ना नहीं चाहिए।”

उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में यदि चढ़ावे से जुड़े वित्तीय लेन-देन में किसी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना पूरे समाज के हित में है। जांच का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सच्चाई सामने लाना होना चाहिए।

आलोक कुमार ने कहा कि यदि जांच निष्पक्ष होगी तो इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा। वहीं यदि किसी भी स्तर पर दोष सिद्ध होता है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आस्था के विषयों पर पारदर्शिता बनाए रखना सभी संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है।

गौरतलब है कि राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में अब तक आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। मामले की जांच एसआईटी और पुलिस कर रही है। जांच एजेंसियां बैंक खातों, नकदी, वित्तीय लेन-देन और अन्य दस्तावेजों की जांच में जुटी हैं। हाल के दिनों में कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

आलोक कुमार के इस बयान को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी हैं। उनके बयान से यह संदेश गया है कि जांच किसी भी स्तर पर सीमित नहीं रहनी चाहिए और यदि किसी के खिलाफ ठोस साक्ष्य मिलते हैं तो उसकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

हालांकि, यह उल्लेखनीय है कि चंपत राय, अनिल मिश्रा या अन्य किसी व्यक्ति के खिलाफ अभी तक किसी न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध नहीं हुआ है। जांच एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

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