लखनऊ
प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस की बड़ी और लगातार कार्रवाई ने सरकारी दफ्तरों में हड़कंप मचा दिया है। शुक्रवार को एक ही दिन में तीन बड़े विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। कन्नौज में सब रजिस्ट्रार, बागपत में जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) और हापुड़ में जीएसटी विभाग का स्टेनो विजिलेंस के शिकंजे में आ गया। इन कार्रवाइयों के बाद प्रदेश के कई सरकारी दफ्तरों में अफरा-तफरी का माहौल है।कन्नौज सदर तहसील स्थित उप निबंधक कार्यालय में विजिलेंस टीम ने सब रजिस्ट्रार अश्विनी कुमार वर्मा को 60 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। आरोप है कि उन्होंने 14 डिसमिल जमीन के बैनामे के लिए पहले डेढ़ लाख रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता छिबरामऊ मोहल्ला निवासी प्रवीण कुमार द्वारा असमर्थता जताने पर सौदा 60 हजार रुपये में तय हुआ। शुक्रवार को प्रवीण कुमार बैनामा कराने पहुंचे तो सब रजिस्ट्रार के निजी कर्मी जितेंद्र कश्यप ने रिश्वत की रकम ली और वह रकम अश्विनी कुमार वर्मा तक पहुंचाई। इसी दौरान पहले से जाल बिछाए बैठी विजिलेंस टीम ने दोनों को दबोच लिया।कार्रवाई के बाद विजिलेंस टीम दोनों आरोपियों को लेकर सदर कोतवाली पहुंची, जहां भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। विजिलेंस के डिप्टी एसपी सुजीत कुमार ने बताया कि सब रजिस्ट्रार अपने निजी कर्मचारी के जरिए रिश्वत का पैसा लेता था और लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं।
उधर बागपत में विजिलेंस की टीम ने जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) अनूप तिवारी को 40 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए उनके ही कार्यालय से गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि राशन डीलर नरेंद्र कुमार से राशन वितरण के एवज में लगातार कमीशन मांगा जा रहा था। शिकायतकर्ता का कहना है कि डीएसओ कई महीनों से 25 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से कमीशन मांग रहे थे और पैसा न देने पर लाइसेंस निरस्त करने की धमकी दे रहे थे।राशन डीलर नरेंद्र कुमार ने विजिलेंस से शिकायत की थी कि क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी (ARO) योगेंद्र सिंह के जरिए भी दबाव बनाया जा रहा है। आरोप है कि ARO पहले ही 10 हजार रुपये ले चुका था। शिकायत की पुष्टि के बाद विजिलेंस की पांच सदस्यीय टीम ने पूरे कार्यालय की घेराबंदी कर जाल बिछाया। जैसे ही नरेंद्र कुमार ने डीएसओ अनूप तिवारी को 40 हजार रुपये दिए, टीम ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान ARO योगेंद्र सिंह मौके से फरार हो गया, लेकिन शाम करीब साढ़े पांच बजे विजिलेंस टीम ने उसे हापुड़ से गिरफ्तार कर लिया।
बताया जा रहा है कि अनूप तिवारी पहले भी विवादों में रह चुके हैं। वर्ष 2024 में जालौन में तैनाती के दौरान गैस एजेंसी संचालकों ने उन पर रिश्वत मांगने के आरोप लगाए थे और विरोध प्रदर्शन भी किया था।इधर मेरठ विजिलेंस टीम ने हापुड़ जीएसटी विभाग में तैनात स्टेनो बाबू जयदीप को 24 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। दादरी गांव निवासी व्यापारी चमन सिंह का जीएसटी विभाग में एक काम लंबित था। आरोप है कि स्टेनो जयदीप ने फाइल आगे बढ़ाने के बदले पहले 48 हजार रुपये की मांग की थी, लेकिन बाद में 24 हजार रुपये में मामला तय हुआ। रिश्वत न देने पर फाइल रोकने और काम लंबित रखने की धमकी दी जा रही थी।
पीड़ित व्यापारी ने मेरठ विजिलेंस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद विजिलेंस टीम ने जाल बिछाया और तय योजना के तहत व्यापारी को रिश्वत की रकम लेकर भेजा गया। जैसे ही जयदीप ने रुपये लिए, विजिलेंस टीम ने उसे मौके पर दबोच लिया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। विजिलेंस इंस्पेक्टर रेणु सिंह ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि रिश्वतखोरी के इस नेटवर्क में अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं या नहीं।प्रदेश में एक ही दिन में हुई इन तीन बड़ी कार्रवाइयों ने साफ कर दिया है कि सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं। जमीन के बैनामे से लेकर राशन वितरण और जीएसटी फाइलों तक, हर जगह ‘सुविधा शुल्क’ का खेल खुलकर सामने आ रहा है। विजिलेंस की इन कार्रवाइयों के बाद सरकारी विभागों में दहशत का माहौल है, जबकि आम जनता अब भ्रष्टाचार पर और सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।


