भारतीयों की पहली पसंद रूस,पाकिस्तानियों की पहली पसंद चीन
नई दिल्ली। अमेरिकी प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे में भारत और पाकिस्तान के बीच कायम गहरे अविश्वास की तस्वीर सामने आई है। सर्वे के मुताबिक, पाकिस्तान में करीब 10 में से 9 लोग भारत को अपने देश के लिए बड़ा खतरा मानते हैं। वहीं भारतीयों की नजर में पाकिस्तान प्रमुख राजनीतिक खतरे के रूप में सामने आया है। हालांकि दोनों देशों के लोगों में पड़ोसी के साथ बेहतर संबंधों की इच्छा भी दिखाई दी।
सर्वे में भारत और पाकिस्तान की विदेश नीति को लेकर भी बड़ा अंतर सामने आया। भारतीयों ने रूस को अपना सबसे अहम साझेदार माना, जबकि पाकिस्तानियों की पहली पसंद चीन रही। रिपोर्ट के मुताबिक भारत किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अमेरिका, रूस और अन्य प्रमुख शक्तियों के साथ अपने हितों के अनुसार संबंध बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ रहा है।
भारत में पाकिस्तान को लेकर अलग-अलग समुदायों की राय में भी अंतर दिखाई दिया। 21 प्रतिशत भारतीय मुस्लिमों ने पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक राय जताई, जबकि हिंदुओं में यह आंकड़ा 6 प्रतिशत रहा। पाकिस्तान को भारत का सबसे बड़ा राजनीतिक खतरा मानने वालों में भी अंतर रहा। 34 प्रतिशत भारतीय मुस्लिमों और 57 प्रतिशत हिंदुओं ने पाकिस्तान को सबसे बड़ा खतरा बताया।
पहलगाम हमले के बाद बढ़ा तनाव
सर्वे में भारत-पाकिस्तान संबंधों में हालिया तनाव का भी उल्लेख किया गया। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद दोनों देशों के रिश्ते और तनावपूर्ण हुए। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया।
भारत ने इसके बाद 1960 की सिंधु जल संधि को रोकने का फैसला किया। पाकिस्तान की कृषि और जल जरूरतों का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी तंत्र पर निर्भर है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी पानी रोकने या कम करने की किसी कोशिश का जवाब देने की चेतावनी दी है।
भारत की रणनीति किसी एक खेमे तक सीमित नहीं
सर्वे के मुताबिक भारत अमेरिका के साथ रक्षा, तकनीक और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहा है, जबकि रूस के साथ उसके पुराने रक्षा संबंध कायम हैं। चीन के साथ सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर संवाद और सहयोग भी जारी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को दर्शाती है। भारत किसी एक बड़ी शक्ति के खेमे में पूरी तरह जाने के बजाय राष्ट्रीय हितों के आधार पर अलग-अलग देशों के साथ संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।


