नई दिल्ली: पतंगबाजी (kites) के मौसम को देखते हुए पर्यावरण विभाग (Department of Environment) ने चीनी मांझे और धारदार सिंथेटिक मांझे के इस्तेमाल को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। राजधानी में प्रतिबंधित मांझे की बिक्री, निर्माण, भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है। नियम तोड़ने वालों को पांच साल तक की जेल और एक लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
तेज धार वाले सिंथेटिक, नायलॉन और चीनी मांझे से इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों के घायल होने और जान जाने का खतरा रहता है। इसके अलावा यह पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने प्रतिबंधित मांझे के खिलाफ सख्ती बढ़ाई है। विभाग के निर्देश के अनुसार पतंग उड़ाने के लिए केवल सूती धागे का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह धागा किसी भी तरह के धारदार कांच, धातु या रसायन से मुक्त होना चाहिए। दुकानदारों और आम लोगों से प्रतिबंधित मांझे की खरीद-बिक्री और इस्तेमाल से पूरी तरह बचने की अपील की गई है।
अधिसूचना के मुताबिक आदेश का उल्लंघन पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत बनाए गए नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में धारा 15 के तहत पांच साल तक की जेल, एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। यदि सजा मिलने के बाद भी कोई व्यक्ति या दुकानदार नियम का उल्लंघन जारी रखता है, तो उसके खिलाफ प्रतिदिन 5,000 रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है।


