मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) जिले के बहसुमा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अकबरपुर सादात गांव के रोंगटे खड़े कर देने वाले अमित कश्यप हत्याकांड (Amit Kashyap murder case) मामले में अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। एडीजे-12 अदालत के न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर ने इस बहुचर्चित मामले में फैसला सुनाते हुए मृतक की पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड यानी फांसी की सजा सुनाई है। सजा सुनते ही दोनों खुद को संभाल नहीं सके और फफक-फफक कर रो पड़े।
इसके साथ ही अदालत ने दोनों दोषियों पर पचास-पचास हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस फैसले का सबसे संवेदनशील पहलू यह रहा कि कोर्ट ने मृतक के तीन मासूम बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और लालन-पालन सहित तमाम जिम्मेदारियां जिला मजिस्ट्रेट यानी डीएम को सौंपने का आदेश दिया है।
जब अदालत ने वर्चुअल माध्यम से पेशी पर जुड़े हत्यारे अमरदीप और उसकी प्रेमिका रविता को मृत्युदंड की सजा सुनाई, तो वे खुद को संभाल नहीं सके और फफक-फफक कर रो पड़े। जेल प्रशासन और मीडिया से बात करते हुए वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज ने बताया कि अदालत का फैसला सुनने के बाद दोनों दोषियों को वापस उनकी बैरकों में सुरक्षित भेज दिया गया है।
उन्होंने कहा कि जैसे ही न्यायालय से उन्हें आधिकारिक वारंट प्राप्त हो जाएगा, उसके तुरंत बाद दोनों को नए कैदी नंबर अलॉट कर दिए जाएंगे। नियमानुसार उनकी बैरकें भी बदली जाएंगी और जेल की अन्य सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं को पूरी सख्ती के साथ अपनाया जाएगा।
मीडिया से बातचीत करते हुए वादी पक्ष के अधिवक्ता बलराज सिंह ने कहा कि पीड़ित परिवार इस फैसले से पूरी तरह संतुष्ट है क्योंकि यह एक बेहद जघन्य अपराध था। उन्होंने बताया कि अदालत ने फैसला सुनाने से पहले मनुस्मृति और माता सावित्री के पौराणिक प्रसंग का विशेष रूप से जिक्र करते हुए बहुत गहरी व्याख्या की थी। न्यायाधीश ने कहा था कि सावित्री जहां अपने पति को यमराज के चंगुल से बचाकर वापस लाई थीं।
वहीं मनुस्मृति में पति की लंबी आयु के लिए पूजा का विधान है, लेकिन रविता ने इस सबसे पवित्र रिश्ते को पूरी तरह कलंकित कर दिया है। न्यायालय के इस कड़े और अनूठे फैसले के बाद मृतक अमित के परिवार के सभी सदस्य पूरी तरह संतुष्ट नजर आए।


