– एसीएस होम को नोटिस, मुख्य सचिव से जवाब तलब
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस और गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने बिना बुलाए डीसीपी साउथ के न्यायालय में उपस्थित होने पर आपत्ति दर्ज करते हुए इसे प्रशासनिक व्यवस्था और जनहित के प्रतिकूल बताया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी जनता की समस्याओं का समाधान करना है, वे न्यायालय में अनावश्यक उपस्थिति दर्ज कराकर अपनी प्राथमिक जिम्मेदारियों से कैसे विमुख हो सकते हैं। अदालत ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण माना।
मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव (गृह) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही प्रदेश के मुख्य सचिव से भी पूरे प्रकरण पर जवाब तलब किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेशों और प्रशासनिक जवाबदेही की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
खंडपीठ ने पुलिस और गृह विभाग के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि न्यायालय की निगरानी वाले मामलों में यह स्थिति है तो आम नागरिकों से जुड़े मामलों की दशा क्या होगी, यह स्वतः समझा जा सकता है। अदालत की इस टिप्पणी को प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बड़ी टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव (गृह) को 15 जुलाई तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही यह संकेत भी दिए हैं कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर मामले में और कड़ा रुख अपनाया जा सकता है।


