संभल के राजेंद्र पेंसिया और आजमगढ़ के रविंद्र कुमार सबसे ज्यादा चर्चा में
रविंद्र कुमार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं तारीफ
लखनऊ। देश के 100 ‘बेस्ट परफॉर्मिंग’ जिला मजिस्ट्रेटों की सूची में उत्तर प्रदेश के आठ जिलाधिकारियों ने जगह बनाकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। प्रतिष्ठित फेम इंडिया मैगजीन के अखिल भारतीय सर्वेक्षण में चयनित अधिकारियों के प्रशासनिक नेतृत्व, जनसेवा, कानून व्यवस्था और विकास कार्यों को आधार बनाया गया।
इस सूची में सबसे ज्यादा चर्चा राजेंद्र पेंसिया और रविंद्र कुमार की रही। संभल में राजेंद्र पेंसिया अपनी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली, पारदर्शिता और त्वरित निर्णयों के लिए पहचान बना चुके हैं। जिसके बलबूते अब उनको बड़े जनपद मुरादाबाद की जिम्मेदारी सौंपी गई है वहीं आजमगढ़ के रविंद्र कुमार ने विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, जनसुनवाई और प्रशासनिक सक्रियता से राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान बनाई है।

इसके अलावा सत्येंद्र कुमार को वाराणसी में विकास परियोजनाओं और व्यवस्थाओं के बेहतर संचालन के लिए सराहा गया। विशाख जी अय्यर ने राजधानी में प्रशासनिक समन्वय और स्मार्ट प्रबंधन को मजबूत किया। विजय कुमार सिंह को कानून व्यवस्था और विकास कार्यों में प्रभावी भूमिका के लिए पहचान मिली।अंजनी कुमार सिंह ने ग्रामीण विकास और जनकल्याण योजनाओं के बेहतर संचालन से अपनी छाप छोड़ी। अस्मिता लाल को महिला सुरक्षा, शिक्षा और प्रशासनिक नवाचारों के लिए सराहा गया।
वहीं अविनाश सिंह ने जनसमस्याओं के त्वरित समाधान और प्रशासनिक दक्षता से लोगों का भरोसा जीता।फेम इंडिया मैगजीन अपने विशेष संस्करण “बेस्ट डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट-2026” में इन अधिकारियों की उपलब्धियों, नवाचारों और जनसेवा से जुड़े कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित करेगी। करीब 800 जिलों में हुए इस सर्वेक्षण में चयनित होना उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
आपकी समस्या का अंतिम पड़ाव वाले अफसर की खासियत
लखनऊ
राजेंद्र पेंसिया की पहचान सिर्फ एक सख्त और प्रभावी प्रशासक के रूप में ही नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देने वाले अधिकारी के तौर पर भी होती है। मुरादाबाद में बतौर जिला अधिकारी वह अक्सर खड़े होकर फरियादियों के पास जाकर जन समस्याएं सुनते हुए देखे जाते हैं उनकी कार्यशैली का अंदाजा उनकी टेबल पर रखी दो खास पट्टिकाओं से लगाया जाता है, जो अक्सर अधिकारियों, कर्मचारियों और फरियादियों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती हैं।
उनकी टेबल पर लगी पहली पट्टिका पर लिखा है —
“आपकी समस्या का अंतिम पड़ाव”
वहीं दूसरी पट्टिका उनकी प्रशासनिक सोच और जिम्मेदारी को दर्शाती है। उस पर लिखा होता है —
“मेरी मेज पर रखी हुई प्रत्येक पत्रावली के पीछे एक व्यक्ति खड़ा अपने कार्य होने की प्रतीक्षा कर रहा है। मेरा यह पहला कर्तव्य है कि मैं सबसे पहले इस पत्रावली का निस्तारण कर उस व्यक्ति को राहत प्रदान करूं।”
प्रशासनिक गलियारों में माना जाता है कि यही सोच राजेंद्र पेंसिया को अन्य अधिकारियों से अलग पहचान दिलाती है। संभल में उनकी त्वरित कार्रवाई, पारदर्शी कार्यशैली और जनसुनवाई की व्यवस्था ने आम लोगों के बीच भरोसा मजबूत किया है। यही वजह रही कि राष्ट्रीय स्तर पर हुए सर्वेक्षण में उन्हें देश के उत्कृष्ट जिलाधिकारियों में स्थान मिला।



